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दूसरी एफआईआर के बाद अब पुलिस ले रही बयान

झीरम हमले की जांच के मामले में लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच दूसरी एफआईआर दर्ज होने के बाद एनआईए और बस्तर पुलिस के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है। बढ़ते विवाद के बीच एक ओर जहां एनआईए ने न्यायालय का रूख कर लिया है तो दूसरी तरफ अब बस्तर पुलिस भी तेजी से जांच कर रही है। यही नहीं मामले में जांच के साथ-साथ घटना के प्रत्यक्षदर्शियों का बयान भी दर्ज किया जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले में पुलिस ने घटना के चश्मदीद रहे बस्तर के कुछ कांग्रेसी नेताओं के बयान दर्ज किए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पुलिस अन्य कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं, सुरक्षाकर्मियों और चालकों के बयान दर्ज सकती है। हालांकि अभी जिन लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं उनके नामों का खुलासा पुलिस अफसर नहीं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि झीरम नरसंहार मामले में पुलिस को कुछ नई लीड मिली है और इसके आधार पर ही पुलिस अपनी जांच को जारी रख रही है। एसपी दीपक झा ने बताया कि विवेचना चल रही है, कई स्थानों से दस्तावेज लिए गए हैं, कुछ लोगों के बयान भी दर्ज किए गए है।

एनआईए की पीटिशन पर सुनवाई जुलाई में
इधर एनआईए ने जगदलपुर के एनआईए कोर्ट में दूसरी एफआईआर के संबंध में जो पीटिशन दायर की है उस मामले में जुलाई के पहले सप्ताह में सुनवाई होनी है। एनआईए की पीटिशन के बाद बस्तर पुलिस को दूसरी एफआईआर के संबंध में कोर्ट में अपना पक्ष रखना है। ऐसा माना जा रहा है कि सुनवाई के पहले बस्तर पुलिस कोर्ट में ऐसे कई ठोस सबूत और बातें रखना चाहती है जिससे कि एनआईए का वह दावा खत्म हो जाए कि वो पहले से ही इस मामले की जांच कर रही है और मामले में कोई नया तथ्य नहीं मिला है तो मामला उन्हें सौंपा जाए। इस मामले में पुलिस कानूनी जानकारों से कानूनी सलाह भी ले रही है। दरअसल, एनआईए ने कोर्ट में पीटिशन दायर की है कि झीरम मामले में वह पहले ही जांच कर रही है ऐसे में नई एफआईआर दर्ज करने के बाद कोई नया तथ्य सामने नहीं आया है तो मामला उसे ही दे दिया जाए।
झीरम मामले में अब तक ये हुआ

  • 25 मई 2013 झीरम हमला।
  • 26 मई 2013 दरभा में हमले के संबंध में एफआईआर हुई दर्ज।
  • 27 मई 2013 को मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई।
  • 24 सितंबर 2014 को एनआई ने चार्जशीट दायर की, 88 नक्सल कैडर संलिप्त बताते 9 के खिलाफ नामजद चार्जशीट पेश की।
  • 28 सितंबर 2015 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट 30 लोगों के खिलाफ दाखिल की गई।
  • 2 जनवरी 2019 कांग्रेस की भूपेश सरकार ने 10 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया।
  • 26 सितंबर 2019 राज्य सरकार ने (एनआईए) की जांच में 10 खामियां गिनाते हुए केस की जांच स्पेशल इंवेस्टिेगेशन टीम (एसआईटी) से कराने की बात कहते केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखी और इस केस को उन्हें ट्रांसफर करने मांग की।
  • 25 मई 2020 झीरम पीड़ितों ने मामले में एनआईए के द्वारा षडयंत्र वाले हिस्से की जांच नहीं करने के आरोप लगाते हुए सिटी कोतवाली में जीरो में एक एफआईआर दर्ज करवाई, इसके बाद इस मामले को दरभा थाने में ट्रांसफर किया गया।


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