भास्कर न्यूज|
शहर से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को ठिकाने लगाने का नगर निगम ने अब तक कोई योजना नहीं बनाई है। नाले की सफाई के कुछ दिनों बाद ही यह कचरा फिर से नालियों और नाले में जमा हो रहा है। इसके चलते आने वाले दिनों में एक बार फिर से लोगों को परेशानी होगी।
जानकारी के मुताबिक शहर के शहीद पार्क और गीदम रोड के नाले को बारिश से पहले साफ करने के लिए नगर निगम के कर्मचारियों ने घंटों मशक्कत की थी लेकिन सफाई के तीन दिनों बाद ये दोनों नाले फिर से प्लास्टिक के कचरे से जाम हो गए हैं। गंगानगर वार्ड पार्षद राजेश राय ने कहा कि तीन दिन पहले नाले की सफाई में सबसे बड़ी बाधा प्लास्टिक का कचरा है। इसको लेकर करीब दो घंटे तक उन्होंने उनकी मौजूदगी में नाले की सफाई कराई लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। बार -बार लोगों से अपील करने के बाद भी लोग प्लास्टिक की बोतलों और कचरे को नालियों में डाल रहे हैं। इसके अलावा नाले की सफाई के बाद बाहर रखा गया प्लास्टिक फिर से नाले में पहुंच रहा है। इसके चलते नाला प्लास्टिक के कचरे से जाम पड़ा हुआ है। शहर के बालाजी वार्ड और महारानी वार्ड के साथ ही अन्य वार्डों में समय पर सफाई नहीं होने से प्लास्टिक का कचरा नालियों में जमा हो रहा है। नगर निगम आयुक्त प्रेम कुमार पटेल ने कहा कि नाले की सफाई को लेकर कर्मचारियों को निर्देश दे दिया गया है। लोग प्लास्टिक के कचरे को नालियों में नहीं फेंके इसकी अपील की गई है।
रायपुर में प्लास्टिक कचरा भेजने की योजना हुई ठप
शहर के प्लास्टिक के कचरे को नष्ट करने के लिए निगम ने करीब सात महीने पहले इस कचरे को रायपुर की अंबुजा और जेके लक्ष्मी सीमेंट कारखाने में भेजने की योजना बनाई थी। योजना के तहत कारखान में नष्ट किए गए पॉलिथीन का उपयोग सड़क निर्माण में किए जाने की थी लेकिन निगम की यह योजना अब तक शुरू नहीं हो पाई है। लगातार हो रही लेटलतीफी को लेकर कभी कचरे की मात्रा कम होने तो कभी कोरोना को इसका कारण बताया जा रहा है। अब अपनी नाकामी को छिपाने के लिए निगम के अधिकारी इसे अगस्त से शुरू करने की बात कह रहे हैं।
हर दिन 3 से 4 टन सूखा कचरा निकल रहा है शहर से
शहर में पिछले कुछ सालों से प्लास्टिक पालिथीन की खपत बढ़ती जा रही है। वर्ष 2015 में जहां हर दिन जगदलपुर शहरी क्षेत्र से तीन से चार टन गीला और सूखा कचरा निकलता था वहीं अब हर दिन सात से 8 टन कचरा निकल रहा है। इसमें से चार टन सूखा कचरा निकल रहा है। इसमें से गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है जो केवल एक सेंटर तक ही सीमित होकर रह गया है। ज्ञात हो कि इस समय शहर में पांच एसएलआरएम सेंटर में से केवल एक सेंटर में ही खाद बनाई जा रही है।
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