बस्तर जिले में राइस मिलर्स द्वारा अमानक चावल की आपूर्ति का सिलसिला थम नहीं रहा है। बार -बार नान के अधिकारियों द्वारा समझाइश देने के बाद भी मिलर्स यह काम बंद करने तैयार नहीं हैं । नतीजा यह है कि इस साल हुई कस्टम मिलिंग में अब तक 15 हजार क्विंटल चावल रिजेक्ट कर दिया गया है जो प्रदेश के अन्य जिलों से काफी ज्यादा है। रिजेक्ट किए गए चावल में टूटन की मात्रा ज्यादा और पालिश की मात्रा कम पाया गया है।
नान के प्रबंधक एससी द्विवेदी ने बताया कि प्रदेश में अब तक हुई कस्टम मिलिंग की मात्रा के आधार पर बस्तर जिले प्रथम और कांकेर जिला दूसरे स्थान पर है। मिलर्स ने अब तक 2457 लाट चावल जमा किया है जिसमें से 15 हजार क्विंटल चावल को रिजेक्ट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि कांकेर जिले में अब तक 3627 लाट चावल मिलर्स ने जमा किया है जिसमें से 69 लाट चावल रिजेक्ट किया गया है। नान प्रबंधक ने बताया कि एक लाट में 290 क्विंटल चावल आता है। गौरतलब है कि जो चावल मिलर्स के द्वारा जमा किया जाता है उसे पीडीएस सिस्टम के तहत इस साल गरीब और सामान्य परिवारों को दिया जाएगा।
तीन क्वालिटी इंस्पेक्टर ने नहीं मानी मिलर्स की बातें
राइस मिलर्स लगातार नान प्रबंधक व 3 क्वालिटी इंस्पेक्टर से संपर्क साधकर चावल खपाने की कोशिश में रहे लेकिन सफल नहीं हो पाए। चावल की क्वालिटी को लेकर प्रबंधक और इंस्पेक्टर ने कोई समझौता नहीं किया और जिस लाट का चावल जांच में अमानक पाया गया उसे मिलर्स को वापस कर दिया। नान प्रबंधक ने सभी क्वालिटी इंस्पेक्टर को चेतावनी देते हुए गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की बात कही थी। मिलर्स के चावल की जांच प्रबंधक और तीन क्वालिटी इंस्पेक्टर परमानंद वर्मा, मनोज चंद्राकर और श्यामलाल साहू कर रहे है।
यह मापदंड बन रहा मिलर्स के लिए मुसीबत
भारतीय खाद्य निगम द्वारा तय मापदंड का पालन मिलर्स द्वारा नहीं किया जा रहा है। इनमें चावल में ब्रोकन की मात्रा 25 प्रतिशत, 14 प्रतिशत पालिश, 14 प्रतिशत नमी से अधिक अशुद्धियां नहीं पाई जानी चाहिए। क्वालिटी इंस्पेक्टर को प्रत्येक बोरे के चावल की जांच करनी होती है। 10 प्रतिशत या इससे अधिक चावल के बोरों के बीच से बंबू कर सैंपल लेने हैं।
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