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इंडो-चाइना बॉर्डर पर शहीद गणेश के पिता बोले- आसमां छूना चाहता था मेरा गणेश, छू लिया

लद्दाख सीमा पर भारत-चीन के जवानों में हुई खूनी झड़प के बीच मंगलवार काे जिले के लिए मनहूस खबर पहुंची। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर हुए चीन के कायराना हमले में चारामा निवासी जवान गणेश कुंजाम शहीद हो गए। कुर्रूटोला के आश्रित गांव गिधाली में गणेश के घर मंगलवार दाेपहर चाचा तिहारू राम के मोबाइल पर सेना के अधिकारी का फोन आया। पता चला कि गणेश लड़ते हुए शहीद हो गए। यह खबर तेजी से फैली। घर पर मातम ताे गांव में सन्नाटा पसर गया। दूर-दूर से लोग माता-पिता ढांढ़स बंधाने पहुंचते रहे। अब परिजन टकटकी लगाए शहीद गणेश का पार्थिव शव आने की राह देख रहे हैं।
बिलखते हुए पिता इतवारू राम बोले-उनके गांव से बहुत से लड़के फौज में हैं। उन्हें देख वह भी चाहते थे कि उनका इकलौता बेटा भी फौज में जाए। पिता के कहने पर ही गणेश 2011 में फौज में शामिल हुआ था। उसका सपना आसमान की ऊंचाइयां छूना था, आज शहीद होकर उसने यह सपना पूरा कर लिया। जनवरी में वह छुट्टी लेकर घर आया था। इस दौरान गणेश की शादी के लिए माता पिता ने सरोना इलाके के गांव सारंडा में उसकी शादी के लिए एक युवती देखी थी। गणेश की रजामंदी के बाद घर में सब शादी की तैयारी कर रहे थे।

फौज में भर्ती होने के बाद गणेश।

बोरिंग की गाड़ी का काम छोड़ देश सेवा से जुड़ा : गिधाली में 20 जुलाई 1993 को एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में जन्मे गणेश की पढ़ाई कुर्रूटोला व चारामा में हुई। 12वीं के बाद पिता ने गणेश को सेना में भर्ती होने राजनांदगांव भेजा था। वहां कामयाबी नहीं मिली। कॉलेज की पढ़ाई के बाद वह बोरिंग की गाड़ी में काम करने चला गया था। फौज में जाने की भी तैयारी करने लगा। रायपुर में 2011 में हुई सेना भर्ती में उसका चयन हो गया।
जाने क्या है एलएसी : एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल या वास्तविक नियंत्रण रेखा) भारत और चीन के बीच की वास्तविक सीमा रेखा है। 4057 किलोमीटर लंबी यह सीमा रेखा जम्मू-कश्मीर में भारत अधिकृत क्षेत्र और चीन अधिकृत क्षेत्र अक्साई चीन को पृथक करती है। यह लद्दाख, कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। यह भी एक प्रकार की सीज फायर (युद्धविराम) रेखा ही है क्योंकि 1962 के भारत चीन युद्ध के बाद दोनों देशों की सेनाएं जहां तैनात थीं उसे ही वास्तविक नियंत्रण रेखा मान लिया गया था।

अब यादें ही शेष... फोटो में पिता इतवारू राम तथा बहन गंगा, गंगोत्री के साथ गणेश।

छोटी बहन को नहीं बताया
बालोद में ब्याही दो बहनों में बड़ी गंगोत्री भाई की फोटो लेकर बिलखती रही। वह यही दोहरा रही थी कि अभी तक छुट्‌टी नहीं मिलने पर भाई नहीं आ पाता तो उसकी तस्वीर पर राखी बांधती थी। अब पूरी जिंदगी फोटो पर ही राखी बांधनी पड़ेगी। गणेश की छोटी बहन गंगा लाइवलीहुड कॉलेज में प्रशिक्षण के बाद पुणे की एक कंपनी में काम कर रही है। गंगा को बुधवार तक नहीं बताया गया था कि ऐसा कुछ हो गया है। उसे किसी बहाने गुरुवार को घर बुलवाया जा रहा है।
बहन बिलखते बोली- छुट्‌टी नहीं मिलती तो फोटो पर बांधते थे राखी, अब हमेशा यही होगा
एक महीने पहले हुई थी आखिरी बार बात

बिहार में गणेश की ट्रेनिंग हुई। इसके बाद से वह अरूणाचल प्रदेश के अलावा अन्य जगहों पर तैनात रहा। दो साल पूर्व उसकी पोस्टिंग लद्दाख में हुई थी। चाचा तिहारू राम ने बताया कि एक माह पूर्व गणेश का फोन उसके मोबाइल पर आया था। उसने बताया था कि उसकी पोस्टिंग अब एलएसी में हो गई है। वहां जाना है। इसके बाद अब और कहीं पोस्टिंग होगी तो बताऊंगा। इसके बाद उसका कॉल नहीं आया क्योंकि जहां वह पदस्थ था वह बेहद सुदूर इलाका था। इस दौरान परिवार के लोग कॉल करते रहे लेकिन उसका मोबाइल हमेशा बंद बताता रहा।

चीन के हमले का विरोध, वहां बनेसभी सामानों का करेंगे बहिष्कार
चीन के खिलाफ बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद ने पुराना बस स्टैंड में प्रदर्शन कर चीन के राष्ट्रपति का फोटो जलाया गया। इस दौरान चीनी सामाना का पूरी तरह से बहिष्कार करने का फैसला लिया गया। विश्व हिंदू परिषद के मीडिया प्रभारी अनुराग उपाध्याय, विभाग संयोजक विजय जैन ने कहा चीन के साथ मुठभेड़ में हमारे देश के 20 सैनिक शहीद हुए हैं। इसको लेकर चीन के खिलाफ देश की जनता में आक्रोश है। हमारा संगठन अब चीनी सामानों का पूरी तरह से बहिष्कार करेगा और लोगों को इसके लिए जागरूक करेगा।



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लद्दाख में साथियों के साथ करतब करते शहीद गणेश कुंजाम (सबसे ऊपर)


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