महासमुंद की तर्ज पर सरगुजा रेंज के भी हाथी प्रभावित गांवों में लोगों को अलर्ट जारी करने के लिए हूटर लगाए जाएंगे।
इससे हाथियों के आने से पहले ही गांव में हूटर बजेगा। सरगुजा रेंज में तीन हाथियों की मौत के बाद प्रदेश स्तर पर चल रही समीक्षा में प्रभावित इलाकों में हूटर लगाने का निर्णय लिया गया है। अब तक रेडियो कॉलर के जरिए निगरानी की जाती थी। वहीं गांव में हाथियों के आने से पहले मुनादी कराई जाती थी, लेकिन इससे लोगों को पता नहीं चल पाता था कि हाथी आस पास हैं। वाइल्ड लाइफ सीएफ एसएस कंवर ने बताया कि मोहनपुर, सोनगरा जैसे गांवों में पहले हूटर लगाए जाएंगे। सरगुजा रेंज में सबसे अधिक हाथियों की समस्या इसी इलाके में है।
बिजली बंद हुई तब भी विभाग को पता चलेगा
इस सिस्टम की लागत करीब 15 हजार रुपए है, जो सिर्फ एक ही बार खर्च करना पड़ेगा। वहीं सिस्टम में सालाना 1536 रुपए का रिचार्ज कराना होगा। यह सिस्टम बिजली से कनेक्टेड होगा। ऐसे में यदि संबंधित गांव में बिजली बंद रही तो भी विभाग को इसकी जानकारी पहुंच जाएगी।
हाथियों के रेडियो कॉलर लगाए, लेकिन गिर गए
वन विभाग ने हाथियों पर निगरानी के लिए रेडियो कॉलर लगाए थे। हाथियों के गले में कॉलर लगाए गए थे। लेकिन एक-एक कर पांचों हाथियों के गले में लगे कॉलर गिर गए। इसके कारण अब अफसरों को हाथियों की लोकेशन का पता नहीं चल रहा है। जिससे हाथियों के आने का पता ही नहीं चलता है।
दो बार बजेगा हूटर: सीएफ
सीएफ कंवर ने बताया कि हूटर के लिए वन विभाग ने मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया है। जो केवल विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के पास होगा। जब भी हाथी ग्रामीण क्षेत्र की ओर बढ़ेंगे, उनकी लोेकेशन के आधार पर संबंधित गांव में मोबाइल के जरिए एक क्लिक से हूटर बजा सकते हैं। हाथियों की दूरी जब गांव से 2 से 4 किमी की होगी तो पहला अलर्ट जारी किया जाएगा, जो 20 सेकेंड का होगा। जब हाथियों की गांव से दूरी 2 किमी से कम रह जाएगी तो दूसरा अलर्ट जारी किया जाएगा। इस दौरान 40 सेकेंड तक हूटर बजेगा।
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