कोरोना वायरस ने जनजीवन को प्रभावित किया है। इससे पेट्स भी अछूते नहीं हैं। यही वजह है कि घर पर कुत्ता-बिल्ली जैसे पशुओं को पालने वाले लोगों ने उनकी सेहत और देखभाल का तरीका भी बदल लिया है। उनके पेट्स तंदुरुस्त और बेहतर महसूस करें इसलिए खास तरीके अपना रहे हैं। मसलन, पेट्स की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए घर में बना खाना दे रहे हैं। इनमें उबली हुईं मौसमी सब्जियां, एनर्जी ड्रिंक, दूध-रोटी, इम्यूनिटी ड्रिंक जैसी चीजें शामिल हैं। लंबे समय से घर पर रहने के कारण पेट्स में चिड़चिड़ापन स्वभाविक है इसलिए पेट्स ओनर उनके खेलने और घूमने-फिरने के समय को बढ़ा रहे हैं। पेट्स को अकेलापन महसूस न हो इसलिए उनके साथ फोटोशूट, उनके लिए खास ड्रेस और जन्मदिन भी मना रहे हैं। मानसून शुरू होते ही पेट्स को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है इसके लिए भी खास तरीके अपनाए जा रहे हैं।
डॉग को दुलारने से पहले और बाद में करता हूं हाथों को सैनिटाइज
मयंक वाढेर के पास डेसोन प्रजाति का डॉगी ग्रूफी है। मयंक ने बताया, अपने साथ ग्रूफी की सेहत का भी ध्यान रखता हूं। हैंडवॉश करने के बाद ही ग्रूफी काे छूता या दुलारता हूं। बाहर से घुमाकर लाने के बाद उसके पैर और शरीर को सैनिटाइज करता हूं। ग्रूफी के पानी के कंटेनर में साफ, ठंडा और उबला पानी रखता हूं इससे दस्त या पेट से संबंधित संक्रमणों का खतरा नहीं रहता।
डॉग को तंदुरुस्त रखने सीढ़ियों का सहारा
देवेंद्र नगर के सुजीत के पास मालटीज प्रजाति की डॉगी है, नाम है डेजी। सुजीत अभी डेजी को आहार में उबली सब्जियां देते हैं। तेल या मसालेदार खाना देने से परहेज कर रहे हैं। डेजी तंदुरुस्त रहे इसलिए वह डेजी के साथ सुबह-शाम कुछ मिनट घर की सीढ़ियां चढ़ते-उतरते हैं। सुजीत ने बताया, लॉकडाउन के दौरान घर पर ही रहने से डेजी चिड़चिड़ी हो गई थी और घर में चहलकदमी भी कम थी। आहार में बदलाव और हल्की वर्जिश से अब वह बेहतर है।
छोटे पेट्स को ज्यादा देखभाल की जरूरत
वेटरनेरी डॉक्टर पदम जैन ने बताया, छोटे पेट्स की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। कई पेट्स ओनर फोन पर अपने पेट्स की सेहत से जुड़ी जानकारी ले रहे हैं। इनमें छोटे डॉग और कैट के ट्रीटमेंट से जुड़े कॉल ज्यादा हैं।
ये सावधानी है जरूरी
- अनजान व्यक्ति को अपने पेट्स को छूने न दें।
- घर में बना खाना दें।
- मौसम बदल रहा है इसलिए वायरल इंफेक्शन का चांस रहता है। इसलिए अलर्ट रहें।
- उम्र के अनुसार खाने की मात्रा तय करें।
- दिनभर में 3-4 बार बैठने की जगह साफ करें।
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