1 जून से अनलॉक वन में ऑटो संचालकों को छूट मिल गई है लेकिन यात्री बसें तथा टैक्सियां नहीं चलने से उनको सवारियां ही नहीं मिल पा रही है। शहर के ऑटो चालकों का कारोबार पूरी तरह दूसरे शहरों से यात्री बसों तथा टैक्सियों से आने वालों पर ही निर्भर रहता है। छूट मिलने के बाद भी सवारी नहीं मिलने से 30 प्रतिशत ऑटो चालक ही ऑटो चला रहे हैं। ऑटो चालकों ने कहा कि स्कूलें नहीं खुलने से बच्चों को स्कूल आदि छोडऩे से भी होने वाली कमाई नहीं हो पा रही है। पिछले तीन महीनों से कारोबार पूरी तरह से ठप होने से बैंकों की किश्तें पटाने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
शहर में कोरोना संक्रमण के प्रभाव से 24 मार्च से हुए लॉकडाउन के साथ ही ऑटो चलना भी बंद हो गए थे। सवारी ऑटो को छूट मिल जरूर गई है लेकिन इनका कारोबार रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। कांकेर शहर तथा आसपास के गांव में 35 से 40 सवारी ऑटो चलते हैं। फिलहाल यात्री बसें चलना शुरू नहीं हुई है। लोकल सवारियां भी कोरोना वायरस के डर से ऑटो की सवारी करने से परहेज कर रहीं हैं।
पहले एक दिन में सारे खर्चे आदि काट कर 400 से 500 रूपए तक कमाई हो जाती थी लेकिन अब कई बार तो दिन भरे खड़े रहने के बाद भी बोहनी तक नहीं हो पाती। बहुत से ऑटो चालकों ने तो परिवार का पेट पालने सब्जी आदि बेचना शुरू कर दिया है।
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