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महाप्रभु से नाराज लक्ष्मी लौटीं मंदिर, आज लगेगा छप्पन भोग

ऐतिहासिक बस्तर गोंचा महापर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शनिवार को हेरा पंचमी की रस्म हुई। हेरापंचमी के नाम से मनाई जाने वाली इस रस्म को समाज के लोग दो भागों में बंटकर पूरा किया। 5-5 लोगों ने दोनों डोलियों को उठाया। गोंचा में पूरी होने वाली रस्मों में से इस रस्म में माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ की तलाश में जनकपुरी में पहुंची हैं, जहां उनकी बातचीत हुई। वापस न चलने की बात पर नाराज लक्ष्मी भगवान के रथ को ठोकर मारकर मंदिर लौट आई हैं।
वहीं गोंचा महापर्व में रविवार को छप्पन भोग अर्पण का कार्यक्रम होगा। सिरहासार भवन में विराजे भगवान जगन्नाथ को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 56 भोग का अर्पण ओंकार पांडे करेंगे। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ लोगों के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। इस दौरान लोगों की भीड़ जमा नहीं होगी बल्कि पांडे परिवार के लोग शामिल होंगे। इस रस्म में भी छप्पन भोग बड़े-बड़े पात्रों की जगह छोटे-छोटे पात्रों में ही रहेगा।

इसलिए होती है हेरापंचमी की रस्म
रथयात्रा की पौराणिक परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ अनसर काल के बाद माता लक्ष्मी से देशाटन की बात कहकर जगन्नाथ मंदिर से निकलते हैं लेकिन वे कहां ठहरे हैं इसकी जानकारी वे देवी लक्ष्मी को नहीं देते हैं। पांच दिन बाद भी महाप्रभु के घर नहीं लौटने पर माता लक्ष्मी उन्हें खोजने के लिए मंदिर से निकलती हैं। इस रस्म को ही हेरापंचमी कहते हैं। शनिवार की शाम सालों से चले आ रहे विधान के तहत माता लक्ष्मी पालकी में सवार होकर राजा के महल पहुंचीं।

चांदी से बनी लक्ष्मी की मूर्ति का ही उपयोग
हेरापंचमी विधान को पूरा करने समाज के लोग सालों से चांदी से बनी लक्ष्मी की मूर्ति का उपयोग करते हैं। इस साल दोनों डोलियों में चांदी की प्रतिमा विराजित की गई थी । करीब डेढ़ किलो से ज्यादा वजनी मूर्तियों को समाज के लोगों ने ही बनवाया है। वर्ष 1408 से मनाए जाने वाले इस महापर्व में अब तक केवल चांदी की मूर्ति का उपयोग किया जा रहा है। सालों पुरानी परंपरा का पालन इस साल भी लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए किया।



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An angry Lakshmi returned to Mahaprabhu temple


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