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मलेरिया-गठिया की दवा के साथ बाकी सामान्य मेडिसिन ही दे रहे

गठिया, मलेरिया व जोड़ों के दर्द रूमेटो आर्थराइटिस के मरीजों को कोरोना होने की संभावनाएं इसलिए कम बताई जा रही हैं, क्योंकि इनके मरीजों को दी जाने वाली दवा ही फिलहाल कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए दी जा रही है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे रोगी अति आत्मविश्वास में न रहें। जरूरी सावधानी व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। आईसीएमआर व फ्रांस में हुई रिसर्च में इस बात की पुष्टि कर दी है कि विशेष दवा कोरोना के लिए कारगर तो है, लेकिन ऐसे मरीजों में भी कोरोना का संक्रमण मिल चुका है। दरअसल कोरोना के इलाज को लेकर लोगों में कई तरह के संशय हैं। डाक्टरों का कहना है कि कम वायरल लोड वाले (छत्तीसगढ़ में अधिकांश यही) मरीज इन्हीं दवाइयों के हफ्तेभर के डोज से अासानी से ठीक हो रहे हैं और इलाज का तरीका भी बिलकुल सामान्य ही है।
कोरोना के इलाज में लगी विशेषज्ञों की टीम के डाक्टरों ने भास्कर को बताया कि कोरोना के मरीजों को क्लोरोक्विन और एजीथ्रोमाइसिन जैसी दवाइयां खास अनुपात में दी जा रही हैं। इनका अनुपात बिगड़ा तो ये घातक हो सकती हैं, इसलिए डाक्टर की निगरानी जरूरी है। इन दवाइयों का मर्जी से उपयोग करना खतरनाक भी हो सकता है। जहां तक कोरोना के गंभीर मरीजों का मामला है, उनके नसों में खून का थक्का बनने लगता है। इसलिए खून पतला करने वाली दवा भी दे रहे हैं। प्रदेश के हर अस्पताल में क्लोरोक्विन का बड़ा स्टाॅक है। यही नहीं, सीजीएमएससी के गोदाम में अतिरिक्त 5 लाख टेबलेट हैं, अर्थात इस दवा की कोई कमी नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में सीजीएमएससी को एक खास दवा की 3 लाख टेबलेट और भेजी हैं। मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी में इसकी सप्लाई की जा रही है। ये वही टेबलेट है, जिसे अमेरिका (यूएस) को निर्यात भी किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईसीएमआर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि ये टेबलेट काेरोना के इलाज में कारगर हैं। एम्स, अंबेडकर अस्पताल व सभी सरकारी अस्पतालों में वही दवा मरीजों को दी जा रही है।
आईसीएमआर की अनुशंसा- पंडा
"आईसीएमआर ने पहले ही गठिया, मलेरिया व रूमेटो आर्थराइटिस के मरीजों को दी जाने वाली दवाइयों को कोरोना की रोकथाम में कारगर बताया है। हालांकि ये दवाइयां बिना डॉक्टरी निगरानी से नहीं ले सकते, क्योंकि हार्ट, डायबिटीज, लिवर और कमजोर लोगों के लिए ये दवाइयां घातक हैं।"
- डॉ. आरके पंडा, सदस्य कोरोना कोर कमेटी

"गिलोय, तुलसी, अदरक का काढ़ा, सोंठ, काली मिर्च व पिप्पली का चूर्ण इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। हम वर्षों से इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए संशमनी वटी को दिन में दो बार गरम पानी से लेने और अणु तेल को नाक में दो से तीन बूंद डालने के लिए कहते रहे हैं।"
- डॉ. हरींद्रमाेहन शुक्ल, आयुर्वेद विशेषज्ञ
"कोरोना की रोकथाम के लिए कोई दवाई नहीं दे रहे हैं। मैंने पिछले 50 वर्ष में अपने क्लीनिक से इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए जो होमियोपैथिक नोसोड्स दिए हैं, अब भी वही दिए जा रहे हैं। इन दवाइयों से किसी भी व्यक्ति के शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।"
- डा. ए हिंगोरा, होमियोपैथी विशेषज्ञ



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