बस्तर के प्रसिद्ध गोंचा महापर्व के दौरान सोमवार को नेत्रोत्सव विधान पूरा किया गया। 15 दिन क्वारेंटाइन में रहने के बाद महाप्रभु स्वस्थ होकर निकले। भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के विग्रहों को मुक्ति मंडप से बाहर निकालकर उन्हें गर्भगृह के सामने विराजित किया गया। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र को काजल लगाकर आइना दिखाया गया। चांदी के गहनों से भगवान का श्रृंगार करने के बाद उन्हें नए कपड़े पहनाए गए और चंदन का टीका लगाकर उनकी पूजा-अर्चना की गई। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में रथ यात्रा निकालने की अनुमति दे दी है, लेकिन बस्तर में रथयात्रा को लेकर असमंजस बना हुआ है।
नेत्रोत्सव विधान के दौरान मंदिर के पुजारियों और 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क की अनिवार्यता का पालन किया। इस मौके पर समाज के करीब 25 लोग मौजूद थे। इस विधान को मंदिर के दो पुजारियों बसंत पांडा और दुर्वासा पांडे ने पूरा किया। मंगल आरती, महाभिषेक और श्रृंगार के बाद भगवान नए कलेवर में भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर के पुजारियों ने कहा कि अस्वस्थ होने के कारण लंबे समय तक भगवान जगन्नाथ भक्तों से दूर थे, लेकिन नेत्रोत्सव के बाद यह दूरी मिट गई है। अब भक्त हर दिन भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
तुपकी से सलामी देने पर असमंजस बरकरार, देर रात तक चलती रही बैठक
रथयात्रा के मौके पर मंगलवार को दोपहर बाद भगवान नगर भ्रमण करेंगे या नहीं, इसे लेकर असमंजस है। तहसीलदार मधुकर सिरमौर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पुरी में रथ यात्रा निकालने की अनुमति दे दी है। बस्तर में रथयात्रा को लेकर चर्चा की जा रही है। 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के सदस्यों से बातचीत की जाएगी। इधर समाज के अध्यक्ष हेमंत पांडे ने कहा कि पुराने आदेश के तहत एक रथ का निर्माण कर लिया गया है, लेकिन अब रथयात्रा निकालने की अनुमति नहीं मिल रही। इसके चलते तुपकी बनाने वालों को नहीं बुलाया गया है। इसे लेकर बैठक हुई, लेकिन देर रात तक निर्णय नहीं हो पाया था।
फनस कोसा और गजा मूंग का लगाया भोग
कोरोना संक्रमण के बीच तय शर्तों के अनुसार मनाए जा रहे गोंचा महापर्व में नेत्रोत्सव में भगवान को गजामूंग और फनस कोसा का भाेग लगाया गया। यह भोग लकड़ी के चूल्हे पर बनाया गया। सुबह का प्रसाद 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज द्वारा बनाया गया, वहीं शाम को राधाकांत पानीग्रही द्वारा बनवाया गया, लेकिन मंदिर में श्रद्धालुओं को यह प्रसाद नहीं दिया गया। भगवान का प्रसाद नहीं मिलने के बाद किसी भी श्रद्धालु ने नाराजगी नहीं जताई। 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष हेमंत पांडे ने कहा कि कोरोना संक्रमण के बीच जिला प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद यह पर्व मनाया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3eqbmZd
via
Comments
Post a Comment