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मनरेगा से बनी डबरी में मछली पालन कर कमा रहे हैं हजारों का मुनाफा

मनरेगा से हो रहे आजीविका संवर्धन के कार्यों ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी है। खासकर लॉक-डाउन के दौर में भी मनरेगा से निर्मित संसाधनों ने किसानों और खेतिहर मजदूरों की आजीविका को अप्रभावित रखा है। जांजगीर-चांपा के सीमांत किसान खम्हन लाल बरेठ अपनी डबरी से मछली निकालकर बाजारों में बेच रहे हैं। डबरी के आसपास की जमीन में उगाई गई सब्जियां उन्हें अतिरिक्त आमदनी दे रही हैं। कोविड-19 के विपरीत हालातों के बीच भी उनका परिवार आराम से गुजर-बसर कर रहा है। खम्हन लाल की इस बेफिक्री का कारण मनरेगा के तहत उनके खेत में खुदी डबरी है। इस डबरी ने मछली पालन के रूप में कमाई का अतिरिक्त साधन देने के साथ ही बरसात में धान की फसल के बाद सब्जी की खेती को भी संभव बनाया है। मालखरौदा के चरौदा गांव में डबरी के निर्माण के दौरान किसान खम्हन लाल के परिवार के साथ ही अन्य ग्रामीणों को भी कुल 656 मानव दिवसों का सीधा रोजगार मिला। खम्हन लाल और उनकी पत्नी ने 38 दिन साथ काम कर 6346 रूपए की मजदूरी प्राप्त की।



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