खड़गवां के ग्राम कटकोना नेवारीबहरा तक पहुंचने अब तक सड़क नहीं बनी है। शुक्रवार को यहां प्रसव के बाद एक प्रसूता का स्वास्थ्य बिगड़ने पर जच्चा-बच्चा को एंबुलेंस तक लाने 3 किमी खाट में लेकर आने की नौबत बन गई। बता दें कि जिले में कई ग्रामीण क्षेत्र आज भी विकास की राह देख रहे हैं। बरसात में तो इन इलाकों की ऐसी दुर्दशा हो जाती है कि गांव बाहरी दुनिया से पूरी तरह से कटकर रह जाते हैं।
जनपद पंचायत खड़गवां की नेवारीबहरा पंडो बस्ती कटकोना ग्राम पंचायत अंतर्गत आती है। गांव में 100 से अधिक मकान हैं, लेकिन यहां आने-जाने कच्ची सड़क तक नहीं बन सकी है। ग्रामीण जिस सड़क से आना-जाना करते हैं, वहां गाड़ी चलाना तो दूर बारिश के मौसम में पैदल चलना भी मुश्किल है। ऐसे में सबसे अधिक दिक्कत उस समय होती है जब कोई बीमार पड़ जाए। गांव की सुनीता पंडो को प्रसव पीड़ा होने पर बीते 3 जून को उसके घर में डिलीवरी कराई गई थी। प्रसव के 2 दिन बाद से महिला के स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी थी। शुक्रवार को महिला के बेहोश होने पर परिजन ने 108 और 102 से संपर्क किया, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिल सकी। इसके बाद चिरमिरी से 108 एंबुलेंस को गांव में बुलाया। एम्बुलेंस तीनखूट्टी से पहले ही मिट्टी में फंस गई और पलटते-पलटते बची।
प्रसव पीड़ा बढ़ी तो घर पर ही डिलीवरी की
प्रसूता के पति सोनू लाल पंडो ने बताया कि जब गर्भवती पत्नी को डिलीवरी के लिए अस्पताल ले जा रहे थे, उसकी प्रसव पीड़ा बढ़ने लगी। इस पर घर में ही डिलीवरी कराई गई। कुछ दिन बाद प्रसूता का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। गांव से बाहर जाने सड़क नहीं होने पर वहां कोई वाहन नहीं पहुंच पा रहा था। ऐसे में परिजनों ने प्रसूता और नवजात को चारपाई पर लिटाया और काफी लंबा पैदल सफर किया।
जच्चा-बच्चा दोनों खड़गवां अस्पताल में भर्ती
जच्चा-बच्चा का एंबुलेंस तक लाने पहाड़ का 3 किमी का सफर पैदल ही तय करना पड़ा। महिला को खाट में लिटाकर बारी-बारी से उसे कांधे में ढोकर उस स्थान तक लाया गया, जहां 108 संजीवनी एक्सप्रेस खड़ी थी। यहां से महिला और नवजात को खड़गवां अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। नवजात का स्वास्थ्य ठीक है, लेकिन मां की बिगड़ी तबीयत को देखते हुए चिकित्सक उसके इलाज में जुटे हैं। चिकित्सकीय जांच में पता चला कि महिला के शरीर में खून कम है। खून चढ़ने के बाद स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
सड़क की गुहार लगाकर थक चुके
रामलाल ने बताया खून की कमी से स्वास्थ्य में आई गिरावट और प्रसूता को अस्पताल तक पहुंचाने परिजन को मशक्कत करनी पड़ी। पहाड़, खेत, नाला का रास्ता तय करने के दौरान खाट को ढोने में ग्रामीणों ने भी मदद की। बारी-बारी से खाट को उठाकर प्रसूता को एंबुलेंस तक पहुंचाया। गांव को सड़क से जोड़ने ग्रामीणों ने कई बार गुहार लगाई है, लेकिन कोई पहल नहीं हुई।
बारिश में 3 की जगह 10 किमी सफर
ग्रामीणों की समस्या सिर्फ यहीं समाप्त नहीं होती है। बारिश के दौरान नेवरी बस्ती में रहने वाले ग्रामीण राशन तक नहीं लेने जा पाते हैं, क्योंकि नाला में पानी का उफान होने पर गांव पूरी तरह से पंचायत से कट जाता है। बरसात से पहले ग्रामीण नाले के रास्ते से कटकोना आते-जाते हैं, लेकिन बारिश के बाद कटकोना पहुंचने उन्हें 10 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है।
नवजात स्वस्थ, महिला को इंफेक्शन का खतरा
बीएमओ डॉ. एस कुजूर ने बताया कि नवजात स्वस्थ है, महिला की तबीयत थोड़ी बिगड़ी हुई है। घर पर डिलीवरी में हाइजिन मेंटेन और निमोनिया सहित अन्य इंफेक्शन के खतरे होते हैं, महिला का इलाज जारी है।
सर्वे करा बनवाएंगे सड़क: सीईओ
जनपद पंचायत खड़गवां के सीईओ अनिल कुमार अग्निहोत्री ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि गांव में सड़क नहीं होने से ग्रामीण परेशान हैं, तो सर्वे करवाकर वहां सड़क बनवाई जाएगी।
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