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नक्सलियों को कारतूस की सप्लाई करने में शामिल एएसआई व हेड कांस्टेबल गिरफ्तार

नक्सली लगातार पुलिस और अन्य फोर्स के जवानों को नुकसान पुहंचाने की कोशिश करते हैं। पुलिस जवान भी इनके खिलाफ लड़ाई में लगे हैं। लेकिन हमारी ही पुलिस में कुछ ऐसे गद्दार भी है जो इन्ही नक्सलियों को हथियार और कारतूस सप्लाई करने में शामिल हैं। पुलिस में तैनात कुछ अफसर-कर्मचारी नक्सलियों तक असलहा पहुंचा रहे हैं। हाल ही में नक्सलियों को पहुंचाए जाने वाले कारतूस के मामले में चार दिनों बाद नक्सलियों को कारतूस सप्लाई करने की चेन में संलिप्त पुलिस लाइन में पदस्थ एएसआई आनंद जाटव और हेड कांस्टेबल सुभाष सिंह को गिरफ्तार करने की पुष्टि एसपी शलभ सिन्हा ने सोमवार शाम कर दी। पुलिस अब मंगलवार को दोनों को कोर्ट में पेश करेगी। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में एएसआई व हेड कांस्टेेबल के नाम सामने आने के बाद से पुलिस लगातार उनसे पूछताछ कर रही थी। भास्कर ने सोमवार को ही मामले में शस्त्रागार में पूर्व में पदस्थ हेड कांस्टेबल व एक एएसआई के शामिल होने का खुलासाकर दिया था।
इधर इस मामले में और भी कुछ जवानों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। एसपी शलभ सिन्हा ने बताया कि शुरुआत में एसडीओपी प्रतीक चतुर्वेदी के नेतृत्व में गठित एसआईटी को पूरे मामले की जिम्मेदारी दी गई थी। कारतूस सप्लाई चेन में एएसआई व हेड कांस्टेबल के शामिल होने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी सिद्धार्थ तिवारी के नेतृत्व में 9 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। इधर भास्कर के खुलासे के बाद सोमवार को दिनभर लोग इसकी चर्चा करते रहे। पुलिस के जवानों की इस करतूत को लेकर लोगों में खासी नाराजगी है। लोगों का कहना था कि अगर जवान ही नक्सलियों को असलहा सप्लाई करने लगें तो ऐसे में नक्सलियों का खात्मा कैसे संभव है।
दंतेवाड़ा में भी पकड़े गए थे जवान पर फाइल बंद
इधर दंतेवाड़ा में भी पुलिस ने कुछ समय पहले जवानों को असलहा सप्लाई के मामले में पकड़ा था लेकिन यहां जांच के नाम पर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अब सुकमा जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया है। ऐसे में अब मांग उठ रही है कि इस तरह के मामलों के लिए राज्य स्तर पर एक बड़ा जांच दल गठित किया जाये और हर जिले में जवानों की भूमिका का जांच की जाए।

एक एएसआई, डीआरजी कमांडर व कुछ जवानों के भी शामिल होने की चर्चा
एसपी शलभ सिन्हा ने सोमवार की देर शाम एएसआई आनंद जाटव और हेड कांस्टेबल सुभाष सिंह की गिरफ्तारी की पुष्टि की। लेकिन पुलिस सूत्रों की माने तो एसडीओपी प्रतीक चतुर्वेदी की अगुवाई में पूर्व में गठित एसआईटी की जांच में चौंकाने वाले खुलासे होने के बाद पुलिस के आला अफसर भी हैरान हैं। मामले में एक और एएसआई की संलिप्तता उजागर होने के बाद पुलिस उससे भी पूछताछ कर रही है। हेड कांस्टेबल और दो एएसआई ने एसआईटी की पूछताछ में कारतूसों की सप्लाई चेन में शामिल डीआरजी कमांडर के अलावा कुछ जवानों के नामों का खुलासा किया है। अब पुलिस नक्सल ऑपरेशन में जाने वाले डीआरजी जवानों को भी जल्द अपनी गिरफ्त में ले सकती है।

जानिए, ऐसे पकड़ा गया एएसआई
सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों के शहरी नेटवर्क के सप्लाई चेन में पुलिस जवानों के शामिल होने की जानकारी डेढ़ महीने पहले से ही अफसरों को लग चुकी थी। पुलिस इन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार करना चाहती थी। धमतरी निवासी मनोज सिंह व गुंडरदेही निवासी हरीशंकर गेडाम एएसआई आनंद जाटव से लगातार संपर्क में थे। वे गुरुवार तड़के साढ़े चार बजे स्कॉर्पियों से सुकमा पहुंचे। एएसआई आनंद कारतूस से भरा बैग लेकर मलकानगिरी चौराहे पहुंचा। यहीं से तीनों को पुलिस ने कब्जे में लिया। कुछ देर बाद हेड कांस्टेबल सुभाष सिंह को भी उसके घर से गिरफ्त में लिया। वहां से भारी मात्रा में खाली मैगजीन भी बरामद हुई।



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