बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण के बहाने ऐतिहासिक सप्रे और दानी स्कूलों के मैदानों को छोटा करके वहां सड़क बनाने का काम स्मार्ट सिटी बोर्ड ने मंगलवार को पास कर दिया। फर्क ये है कि इसके लिए आगे आए राजनेताओं ने पैर पीछे खींचे और स्मार्ट सिटी को आगे कर दिया है। पिछले एक हफ्ते से विवादित बूढ़ातालाब सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट को मंगलवार को स्मार्ट सिटी की बोर्ड मीटिंग में रखा गया और इस काम के अधिकार आईएएस एमडी सौरभ कुमार को सौंप दिए गए। बोर्ड ने तालाब के भीतर लक्ष्मण झूला बनाने का निर्णय भी उन्हीं पर छोड़ दिया है। जहां तक तालाब के चारों ओर 30 करोड़ के काम का सवाल है जिसमें स्कूल मैदानों को छोटा करना भी शामिल है, उसे बोर्ड ने मूल योजना के साथ मंजूरी दे दी है। इसी वजह से मंगलवार को दोनों मैदानों के बड़े हिस्से को बाउंड्री से घेरकर अलग करने का काम तेज कर दिया गया।
निगम ने करीब एक माह पहले बूढ़ातालाब में जलकुंभी हटाकर उसे साफ करने का प्रोजेक्ट शुरू किया और यह खामोशी से सौंदर्यीकरण में तब्दील हो गया। तालाब के आउटर और इनर जोन का पूरा प्रोजेक्ट करीब 30 करोड़ की लागत का है। जिसमें दो फेस में काम किया जाना है। फिलहाल स्मार्ट सिटी सप्रे स्कूल और दानी स्कूल के मैदान पर काम कर रहा है। इन मैदानों की जमीन लेकर तालाब किनारे सड़क की चौड़ाई बढ़ाने की योजना है, लेकिन चर्चा यह भी है कि निगम यहां दुकानें या गुमटियां रखकर चौपाटी बनाने जा रहा है। विवाद के बाद अधिकृत तौर पर चौपाटी बनाने की बात का निगम की ओर से खंडन कर दिया गया है।
साइकिल ट्रैक भी बढ़ेगा : बोर्ड की बैठक में दो दर्जन से ज्यादा बिंदुओं पर बैठक में चर्चा हुई है। इसमें शहर में पांच जगहों पर स्मार्ट रोड को भी मंजूरी मिल गई है। पुराने शहर में करीब पचास किलोमीटर की स्मार्ट रोड बनेगी। यही नहीं स्मार्ट रोड के जरिए साइकिल ट्रैक का दायरा भी बढ़ाया जाएगा।
कोरोना जैसी महामारी के दौर में अधिकांश स्मार्ट शहरों में साइकिल को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साधन के तौर पर विकसित करने के लिए फोकस किया जा रहा है। लिहाजा रायपुर में भी इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। फिलहाल शहर में केवल चार किलोमीटर का ही अप एंड डाउन साइकिल ट्रैक है।
वही पुराने प्लान, नया कुछ सोच ही नहीं रहे
तालाबंदी के अर्सा बाद स्मार्ट सिटी के बीओडी मीटिंग लिहाजा इस बात की उम्मीद थी कि कुछ नए प्रोजेक्ट या प्लान इसमें आ सकते हैं। लेकिन पहले की तरह इस बैठक में भी केवल उन्हीं 22 पुराने प्लान पर चर्चा हुई, जिसके बारे में कई बार पहले भी हो चुकी है। बूढ़ा तालाब के मेगा प्रोजेक्ट को छोड़कर जो इक्का दुक्का नए काम सामने आए, उनमें जोनवार सौंदर्यीकरण के हैं। इनके भी टेंडर पहले ही आ चुके हैं। शहर की आम जरूरतों पर कोई नया प्लान नहीं आया है। तालाबों में एसटीपी लगाने, स्मार्ट पार्किंग जैसे कामों के लिए एजेंसियां ही नहीं मिल पा रही है।
पूरी कमान अफसरों को
स्मार्ट सिटी में फैसले लेने का अधिकार तकनीकी तौर पर संचालक मंडल के पास ही होता है। केवल नाम के लिए जनप्रतिनिधियों और आमलोगों की एक एडवाइजरी फोरम भी है। लेकिन रायपुर स्मार्ट सिटी में इसमें आमलोगों के स्थान पर केवल एक एनजीओ को ही रखा गया है। जानकार भी मान रहे हैं कि आम लोगों का दखल नहीं होने के कारण आगे भी स्मार्ट सिटी के कामों में विवाद की स्थितियां बनती रहेगी। स्मार्ट सिटी के संचालक मंडल में नगरीय प्रशासन सचिव, कलेक्टर-एसएसपी, स्मार्ट सिटी के एमडी के अलावा आरडीए और चिप्स के सीईओ हैं।
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