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उरला एसोसिएशन से सीएम ने कहा- बाहर से लौट रहे श्रमिकों को उद्योगों में रोजगार दें

सीएम भूपेश बघेल ने उरला इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से कहा कि राज्य वापस लौटे रहे स्थानीय श्रमिकों को अपने उद्योगों में रोजगार दें। साथ ही लोकल पर फोकस के नए कांसेप्ट के तहत राज्य के लघु वनोपज उत्पाद पर आधारित उद्योग लगाने प्रेरित किया। इससे वनों को बचाने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
सीएम बघेल ने कहा कि प्रदेश में लगभग 1200 करोड़ रुपए का लघु वनोपज का कारोबार है। बहुत सी बहुमूल्य औषधि और लघु वनोपज है, जिनका वेल्यू एडिशन कर देश भर में फैले बाजार का लाभ उठाया जा सकता है। यदि उद्योग इन वस्तुओं का वेल्यू एडिशन और ब्रांडिंग करते हैं तो उनकी कीमत बढ़ेगी। सीएम ने कहा कि राज्य में लघु वनोपज आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं है।
राज्य की नई औद्योगिक नीति में वन आधारित उद्योगों को प्राथमिकता एवं कई प्रकार की रियायत दी जा रही है। उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य में भरपूर विद्युत, सस्ता श्रम और पर्याप्त पानी भी उपलब्ध हैं। इसका लाभ स्थानीय उद्योगपतियों को लेना चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू भी उपस्थित थे।
एसएचजी और कलेक्टर को बताएं जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में उद्योगपति उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी कीमत को लेकर स्व-सहायता समूहों और संबंधित जिला कलेक्टरों से बातचीत करके उन्हें अपनी आवश्यकता के बारे में बता सकते हैं। इस आधार पर समूह उत्पाद उद्यमी को उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने उद्योगपतियों से कहा कि उद्योगों के संचालन का अनुभव, पूंजी और दक्ष लोगों की टीम आपके साथ है। इसका उपयोग वन क्षेत्रों में उद्योग लगाने पर भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा के जंगलों में बहुमूल्य लघु वनोपजों का भंडार है। महिला समूह संग्रहण और प्रसंस्करण का काम कर रही हैं। यदि वहां लघु वनोपज जैसे शहद, इमली, चिरौंजी, तिखुर, आवला, हर्रा, बहेरा आदि पर आधारित उद्योग लगाया जाता है तो देश भर के बाजार का लाभ उठाया जा सकता है।



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उद्योगपतियों से चर्चा करते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल।


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