जिले में 1 जून से लेकर अब तक हुई 222.2 मिमी बारिश ने किसानों को राहत देने के बजाय उनकी परेशानी का कारण बन रही है। सिंचाई संसाधनों की कमी के चलते सबसे अधिक परेशानी रोपा लगाने वाले किसानों को हो रही है।
कम रकबे में अधिक उत्पादन के लिए इस विधि से खेती करने वाले किसान अब तक जिले के सातों ब्लाकों में केवल 4200 हेक्टेयर में धान की रोपाई की है जबकि कृषि विभाग ने इस साल 36 हजार 500 हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा है। इस समय धान की सबसे अधिक खेती बकावंड ,बस्तर और जगदलपुर ब्लाक में हो रही है। इसके अलावा धान की बुआई का लक्ष्य69 हजार 500 हेक्टेयर रखा गया है जिसमें से अब तक 52149 हेक्टेयर रकबे में धान की बुआई हो गई है। गौरतलब है कि पिछले साल बस्तर जिले में 1 से 20 जून तक 188 मिमी बारिश हुई थी जबकि इस साल जिले में 222 मिमी बारिश हो चुकी है लेकिन इसका फायदा धान की रोपाई करने वाले किसानों को नहीं मिला है । कृषि विभाग के सहायक संचालक विकास साहू ने कहा कि बारिश की कमी की वजह से धान की रोपाई आंशिक रूप से कम हो पाई है। बावजूद इसके खरीफ फसल कार्यक्रम को लेकर जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है वह जरूर पूरा हो जाएगा। किसान अभी कुछ दिनों पहले रोपाई शुरू की है। अभी खंड बारिश हो रही है आने वाले दिनों में होने वाली बारिश का फायदा रोपाई करने वाले किसानों को मिलेगा।
सिंचाई संसाधनों की कमी किसानों को पड़ रही है भारी
बस्तर जिले में सिंचाई संसाधनों की कमी के चलते किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है । पिछले साल तक किसानों को राहत देने के लिए संचालित शाकंभरी योजना का फायदा देने के लिए इस साल कृषि विभाग को लक्ष्य नहीं मिला है। जबकि इस योजना का फायदा बस्तर जिले के करीब 8 हजार किसान ले चुके हैं । योजना का लाभ नहीं मिलने से किसानों को दिक्कतें हो रही हैं । गौरतलब है कि पहले इस योजना का संचालन कृषि विभाग के द्वारा किया जाता था अब यह चैप्स के माध्यम से संचालित हो रही है ।
अभी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो ही बारिश
किसान महेंद्र कुमार ने कहा कि इस साल 7 एकड़ में धान की रोपाई करने के लिए पलहा डाला था जो बारिश की कमी से पीला पड़ गया है। दो से तीन दिन में बारिश नहीं होने से यह खराब हो जाएगा । बोर में पानी कम आने के चलते रोपाई पलहे की सिंचाई और रोपाई नहीं हो पा रही है।
तेलीमारेंगा के किसान विषु ने बताया कि उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं होने से पलहा पीला पड़ गया है।
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