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नक्सली पिंटू राणा का दस्ता गिरिडीह-जमुई में सक्रिय

रामजी,कोरोना काल में माओवादियों की सक्रियता ने प्रत्यक्ष तौर पर पुलिस की परेशानी बढ़ायी है। जोनल कमांडर पिंटू राणा दस्ते के साथ गिरिडीह-जमुई जिले के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय हैं। इसकी बानगी है पन्द्रह दिन के अंदर भाकपा माओवादियों ने झारखण्ड-बिहार के सीमाई जंगली क्षेत्र में सरकार द्वारा संचालित योजनाओं को पूरा करने में जुटे मजदूरों की बेरहमी से पिटाई के साथ-साथ जेसीबी को आग के हवाले करना, मजदूरों की पिटाई व मशीनों को जलाना लेवी नहीं मिलने से बौखलाये पिंटू राणा के दस्ते ने की है। इससे साफ जाहिर है कि ठेकेदार इलाके के माओवादियों को गुपचुप तरीके से लेवी पहुंचा रहे हैं। माओवादियों को बगैर लेवी दिये सीमावर्ती इलाकों में योजनाओं को पूरा करना फिलहाल किसी ठेकेदार के लिए संभव नहीं है। जबकि जिले के तिसरी-गांवा और देवरी में सीआरपीएफ के कैंप भी हैं।

बावजूद ठेकेदार गुपचुप तरीके से इलाके के माओवादी को 10 प्रतिशत लेवी देकर काम पूरा कर रहे हैं। सवाल उठना तय है कि जब इन इलाकों में पहले से सीआरपीएफ तैनात हैं तो फिर ठेकेदार लेवी क्यों दे रहे हैं। लेवी मांगने की जानकारी ठेकेदार प्रशासन को क्यों नहीं दे रहे? जबकि भेलवाघाटी को जमुई जिले से जोड़ने वाले इलाकों में माओवादी गतिविधि में तेजी देखी गयी है। गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ द्वारा जंगली क्षेत्र में लगातार भाकपा माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने के बावजूद माओवादियों के द्वारा छोटी- बड़ी घटना को अंजाम देकर आराम से निकल जा रहे हैं जो जिला पुलिस व सीआरपीएफ के लिए एक चुनौती है। लगातार इस क्षेत्र में दस्ते की धमक देखी जा रही है। पुलिस लगातार सर्चिंग कर रही है।



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