राजधानी में 900 टीमों ने फील्ड में उतरकर कोविड सर्वे शुरू कर दिया है। कोरोना संदिग्धों की तलाश करने की गरज से कराया जा रहा सर्वे नाम, पता और ट्रैवल हिस्ट्री पूछने तक ही सिमट गया है। सर्वे करने वाली टीम न तो थर्मल स्क्रीनिंग के जरिये तापमान चेक कर रही है और न ही घर के सभी सदस्यों का विस्तार से ब्योरा लिया जा रहा है। सर्वे करने वाली ज्यादातर टीमें उमस की वजह से पीपीई किट भी नहीं पहन रही हैं।
सर्वे टीमों को 10 दिन के भीतर शहर के एक-एक घर का ब्योरा इकट्ठा कर रिपोर्ट तैयार करने का टारगेट दिया गया है। एक टीम के हिस्से लगभग 500 घर आए हैं। टाइम कम होने के कारण भी सर्वे में बेहद हड़बड़ी की जा रही है। घरों में केवल नाम और ट्रैवल हिस्ट्री पूछकर टीम आगे बढ़ जा रही है। कई जगह दो-तीन मंजिला इमारत में केवल नीचे रहने वालों का ही नाम और हिस्ट्री एंट्री की जा रही है। ऊपर की मंजिल पर टीम पहुंच ही नहीं रही है।
दवा की दुकान से सर्दी-बुखार की दवा लेने वालों का डेटा भी : डॉक्टरों के क्लिनिक अस्पताल से लेकर दवा की दुकान पर भी जाकर टीमें सर्दी खांसी बुखार की दवाएं लेने वालों की जानकारी ले रही है। इस बारे में पहले ही निर्देश जारी किया जा चुका है कि सर्दी-जुकाम की दवा लेने वालों का रिकार्ड मेडिकल स्टोर्स संचालक को रखना होगा। प्रशासन की इस सख्ती के चलते लोग अब गली मोहल्लों की छोटी दवा दुकानों से सर्दी खांसी बुखार की दवाएं चोरी छिपे ले जा रहे हैं। अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों का डाटा डेली अपडेट हो रहा है।
कुछ टीमें पीपीई किट पहनकर निकलीं, तो कुछ नजर आए केवल मास्क में
कोई सर्वे टीम पीपीई किट पहनकर घूम रही है, तो कुछ टीम के सदस्य मास्क तक नहीं लगा रहे हैं। गली मोहल्लों में घूमने वाली टीमों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को रखा गया है। वे घर से चार-पांच फुट की दूरी से जानकारी लेकर चले जा रहे हैं। घर के सभी सदस्यों के नाम के अलावा वे केवल ये पूछ रहे हैं कि कोई सदस्य पिछले 14 दिनों के भीतर बाहर से तो नहीं आया? कहीं कहीं बुखार या बीमारी से संबंधित सवाल जरूर पूछ लिए जा रहे हैं।
जहां 5 मिनट लगना है वहां सेंकेंडों में आगे बढ़ रही टीम
सर्वे के लिए शहर को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उसी हिसाब से एक-एक टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक टीम को दस दिन में औसतन 500 घरों में दस्तक देनी है। इस तरह एक दिन में केवल पचास घर जाना है। अाला अफसरों ने सर्वे के लिए टीमों को जो ट्रेनिंग दी है। उसके मुताबिक तीन तरह के प्रपत्र भरने में एक टीम को अधिकतम पांच मिनट तक का वक्त लग सकता है। ज्यादातर सर्वे टीम के सदस्य केवल परिवार के मुखिया का नाम मोबाइल नंबर पूछकर चंद सेंकेंड में ही प्रपत्र भर रही है।
किट पहनकर पैदल चलना मुश्किल
गर्मी और उमस भरे मौसम में पीपीई किट पहनकर पैदल चलना मुश्किल है। कुछ सर्वे टीम के सदस्यों ने बताया कि उन्हें सर्वे करने के लिए फेस शील्ड, पीपीई किट, दस्ताने एक किट के तौर पर मुहैया कराए गए हैं। उमस इतनी है कि पीपीई किट पहनकर सर्वे किया ही नहीं जा सकता।
सामान्य सर्दी-जुकाम भी छिपा रहे
कोरोना मरीजों के साथ हो रहे भेदभाव भरे बर्ताव का डर ऐसा है कि ज्यादातर लोग सर्दी खांसी बुखार के लक्षण भी छिपा रहे हैं। पूरे परिवार की थर्मल स्क्रीनिंग नहीं हो रही है। इस वजह से लोग सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार होने के बावजूद सर्वे टीम को सच्चाई नहीं बता रहे हैं।
जानकारी जुटाना पहला लक्ष्य
"सर्वे कर रही टीमों को पीपीई किट मास्क समेत सभी जरूरी सामान दिए गए हैं। चूंकि ये सर्वे घर के बाहर से ही करना है, इसलिए जो लोग नहीं पहन रहे हैं, उससे संक्रमण का खतरा नहीं है। थर्मल स्क्रीनिंग फिलहाल नहीं कर रहे हैं, क्योंकि पूरे शहर की एक टाइमफ्रेम में जल्दी से जल्दी जानकारी जुटाना पहला लक्ष्य है। हालांकि पहले थर्मल स्क्रीनिंग का प्लान था। ऐसे लोग जो संक्रमित हो सकते हैं, उनका सैंपल लेकर जांच करवाई जाएगी। लोगों से अपेक्षा करते हैं कि वे सही जानकारी दें ताकि शहर को सुरक्षित रखने की कोशिश कामयाब हो सके।"
-पुलक भट्टाचार्य, अपर आयुक्त, ननि
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