कोरोना के बिना लक्षण वाले मरीज मिलने के बाद अब दुर्ग जिले में नए तरीके से जांच होगी। आबादी के बीच पांच लोगों के सैंपल लिए जाएंगे। इस पांचों सैंपल का टेस्ट होगा। इस सिस्टम में यह नया यह होगा कि एक भी सैंपल पॉजिटिव निकला तो पांचों सैंपल को आरटीपीसीआर जांच के लिए भेजा जाएगा। जिले में 16 जून से ट्रू नॉट से जांच की सुविधा शुरू की जा रही है। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इस तरह के पूल टेस्ट के लिए गाइड लाइन जारी किए हैं।
दुर्ग जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसलिए जिले में कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने आईसीएमआर की गाइड लाइन के मुताबिक पूल टेस्ट करवाने की तैयारी करवा रहे हैं। जिला अस्पताल दुर्ग में ट्रू नाट मशीन लग जाने के बाद इस पूल टेस्ट को अंजाम दिया जाएगा। पूल टेस्ट में लो रिस्क एरिया यानी बीमारी से कम प्रभावित क्षेत्र को लिया जाएगा।
रिजल्ट निगेटिव तो अन्य भेजे जाएंगे क्वारेंटाइन सेंटर
आबादी में बीमारी का पता लगाने के लिए पूल टेस्टिंग की जाती है। इसमें पांच सेंपल की थोड़ी मात्रा एक हीमशीन में डाली जाएगी। फिर इसमें जांच होगी। यदि एक भी व्यक्ति में संक्रमण होगा तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाएगी। तो दोबारा जांच फिर से की जाएगी। दोबारा जांच में यदि रिजल्ट निगेटिव आता है तो ग्रुप के पांचों की रिपोर्ट निगेटिव होगी। यानी पांच बार टेस्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक बार में ही पता लग जाएगा।
वायरल लोड होगा कम, बढ़ेगी संदिग्धों की जांच
पूल सिस्टम से जांच करने में वायरल लोड भी कम होगा। साथ ही समय और खर्च की बचत होगी। वर्तमान में जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा किट सिस्टम से जांच की जा रही है। किट जांच में सरकार को प्रति रैपिड 2500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। रेपिड किट से जांच पुख्ता नहीं माना जाता है।
ट्रू-नॉट मशीन को जेनेटिक वार्ड में कर रहे स्टॉल
सीएमएचओ दफ्तर के सामने दस बिस्तर का जेनेटिक वार्ड है। इस वार्ड का उपयोग अब ट्रू नाॅट मशीन के लिए करेंगे। यहां मशीन स्टॉल करने की तैयारी की जा रही है। सीजीएमएससी द्वारा ट्रू नॉट मशीन भेजी गई। इस मशीन के आने से अब सैंपलों की जांच व पूल टेस्ट यही हो जाएगी। पहले सेंपल लालपुर भेजे जा रहे थे।
16 जून से जिले में शुरू होंगे ट्रू नॉट टेस्ट, तैयारी पूरी
कलेक्टर डॉ सर्वेशवर नरेन्द्र भूरे ने बताया कि ट्रू नॉट मशीन 16 जून तक शुरू करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इस मशीन के शुरू हो जाने के बाद आईसीएमआर की गाइड लाइन के मुताबिक पूल टेस्टिंग की तैयारी चल रही है। पहले हमारे पास टेस्टिंग के लिए कोई मशीन नहीं थी।
कंटेनमेंट से लगे इलाके होंगे इस टेस्ट के दायरे में
पूल टेस्ट वहीं करना है जहां कम कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसलिए अटेंचमेंट जोन के आसपास लगे इलाके में यह टेस्टिंग करनी है। जिले में वर्तमान में 29 कंटेनमेंट जोन है। इस कंटेनमेंट जोन से लगे इलाके में कोरोना संक्रमण की संभावना बनी हुई है। मसलन यदि सेक्टर-4 बीएसएफ हॉस्टल के एरिया कंटेनमेंट जोन में हैं। इस जोन में लगे सेक्टर 4 की आबादी भी जुड़ी है।
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