मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिजली बिलों में उपभोक्ताओं को दी जा रही छूट का स्पष्ट उल्लेख न होने पर बिजली कंपनियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने 3000 करोड़ के मड़वा परियोजना की गड़बडियों जानकारी ली और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम को बताया गया कि मड़वा में 500 मेगावाट इकाई-2 जनवरी से बंद है। इसमें सुधार कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि लाॅकडाउन के दौरान अन्य प्रदेशों से छत्तीसगढ़ लौटे श्रमिकों को उनके कौशल के अनुसार सब स्टेशन, लाइन विस्तार और निर्माण कार्यों में काम दिया जाना चाहिए। ताकि उन्हें राज्य में ही रोजगार मिल सके।मुख्यमंत्री शुक्रवार को सीएम हाउस में उर्जा विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।
पुनर्गठन पर भी की चर्चा : सीएम ने बैठक में छत्तीसगढ़ में वर्तमान में पांच विद्युत कम्पनियां हैं, इनका पुनर्गठन कर तीन कम्पनी बनाने के विकल्प पर चर्चा की गई। बैठक में कंपनियों की राजस्व हानि और वितरण कंपनी लाइनलास कम करने के उपायों की गहन समीक्षा की। बताया गया कि कोरोना संक्रमण और लाॅकडाउन के चलते अप्रैल मे राजस्व में 212 करोड़ रुपए की कमी आई है। एमडी अब्दुल कैसर हक ने बताया कि अक्टूबर तक 1510 करोड़ रुपए की राजस्व में कमी अनुमानित है।वितरण कम्पनी का विभिन्न श्रेणी के उपभोक्तााओं से 6324.62 करोड़ रुपए बकाया है। बैठक में प्रबंध निदेशक ने बताया कि ट्रांसमिशन क्षति को कम करने बीते 3 सालों में 69 अति उच्च दाब उप केंद्र एवं ट्रांसमिशन लाइनें बिछाईं गईं हैं। इससे ट्रांसमिशन में 2.98 प्रतिशत की कमी आयी है। सीएम ने पूरे प्रदेश में कृषि पंपों के लिए फीडरों को अलग करने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। बताया गया कि कुुल 1179 फीडरों में से 653 फीडर अलग कर लिए गए हैं।
सीएम ने विद्युत कंपनियों के पास खाली जमीनों की जानकारी ली। उन्होंने बंद हो चुकी कोरबा पूर्व 200 मेगावाट पावर प्लांट की भूमि का व्यवसायिक उपयोग करने के निर्देश दिए। हालांकि इसका इंजीनियर्स एसोसिएशन ने विरोध किया है।
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