अंबेडकर अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना संदिग्धों की जांच के लिए बनाई ओपीडी का स्थान इंडियन काॅफी हाउस से बदलकर डीपी वार्ड में कर दिया है। यह नेहरू मेडिकल कॉलेज के मेन गेट के सामने स्थित है। इससे मरीजों को आने जाने में सुविधा होगी। कोरोना के बढ़ते मरीज को देखते हुए प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है। वहां कोरोना के लक्षण वाले मरीज इलाज करवा सकते हैं। ऐसे मरीजों को मुख्य ओपीडी में न जाना पड़े और संक्रमण की आशंका न रहे, इसलिए ऐसी व्यवस्था की गई है। डीन डॉ. विष्णु दत्त ने बताया कि नया कोरोना वार्ड तैयार है। इसमें जरूरत के अनुसार मरीजों को भर्ती किया जा सकता है।
एम्स में अधीक्षक रिटायर, डिप्टी डायरेक्टर भी रिलीव, पूरी जिम्मेदारी डायरेक्टर पर
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में मेडिकल अधीक्षक रिटायर हो चुके हैं। वहीं डिप्टी डायरेक्टर प्रशासन को मूल विभाग भेजा जा चुका है। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी डायरेक्टर डॉ. नितिन एम नागरकर पर आ गई है। लॉकडाउन के कारण नई भर्ती के लिए इंटरव्यू भी नहीं हो पा रहा है। हालांकि भुवनेश्वर एम्स के डिप्टी डायरेक्टर को रायपुर का प्रभार दिया गया है। हालांकि लॉकडाउन ज्वाइन करना मुश्किल हो रहा है। मेडिकल अधीक्षक डॉ. करण पीपरे 31 मई को रिटायर हो चुके हैं। वहीं डिप्टी डायरेक्टर नीरेश शर्मा को उनके मूल विभाग टेलीफोन भेज दिया गया है। अब अधीक्षक का काम डिप्टी मेडिकल अधीक्षकों को दिया गया है। एम्स में कोरोना के सबसे ज्यादा मरीज भर्ती हैं। ऐसे में डॉक्टरों के साथ समन्वय व नए निर्देश की जिम्मेदारी अधीक्षक पर होती है।
संक्रमण काल में अधीक्षक व डिप्टी डायरेक्टर को एक्सटेंशन मिलने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दोनों ही अधिकारियों को निराशा हुई है। डॉ. पीपरे न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के एचओडी भी थे। हालांकि इस विभाग को चलाने के लिए एक डॉक्टर और है। डायरेक्टर डॉ. नागरकर का कहना है कि दो अधिकारियों के जाने से दूसरे अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। लॉकडाउन में इंटरव्यू करना मुश्किल है, लेकिन अगले हफ्ते नए अधीक्षक नियुक्त कर दिया जाएगा।
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