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ये हैं हमारे डाॅक्टर जो जिंदगी देने के साथ जिंदादिली से जीते भी हैं, कोई टेनिस प्लेयर तो कोई शूटर

मोहम्मद इमरान नेवी | डाॅक्टर शब्द सुनते ही मन में एक सफेद एप्रन पहना व्यक्ति और गले में स्थेिटस्कोप लगाए व्यक्ति की छवि सामने आ जाती है। लेकिन आज डाॅक्टर्स-डे पर हम ऐसे डाॅक्टर्स की कहानियां सामने ला रहे हैं जो जो उनके पेशे से बिल्कुल जुदा हैं। इनमें डॉक्टरी के अलावा और भी प्रतिभाएं और शौक हैं जिन्हें ये जिंदादिली के साथ जीते हैं। इनमें कोई फुटबॉलर है तो कोई शूटर।

डॉ. केएल आजाद: बेहतरीन फुटबॉलर और टेनिस खिलाड़ी, रोजाना सुबह 3 घंटे मैदान में बिताते हैं
डॉ. केएल आजाद मेकॉज के सुप्रींटेंडेंट हैं। पर मॉर्निंग स्टार क्लब से फुटबॉल भी खेलते हैं। डिफेंस और फारवर्ड में उतरते हैं। कई टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुके हैं। लॉन टेनिस भी बखूबी खेलते हैं। कुछ दिन पहले ही लॉन टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी बने हैं। डाॅ. आजाद बताते हैं कि वे हर दिन 3 घंटे मैदान में बिताते हैं। आजाद कहते हैं दिनभर मरीजों के बीच रहने और जिम्मेदारियों के बीच सुबह का समय जो मैदान में बीतता है वह सबसे खुशनुमा होता है और दिनभर काम करने की नई उर्जा देता है।
डाॅ. अफरोज फातिमा अंसारी: शहर की नौकरी छोड़ बस्तर आईं, संभाग की पहली और इकलौती न्यूरो फिजिशियन
डाॅ. अफरोज फातिमा अंसारी न्यूरो फिजिशियन हैं, पति नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। वे रहने वाली तो महाराष्ट्र की हैं पर बस्तर में न्यूरो की कमी को देखते हुए आ गईं। अफरोज पहली न्यूरो डाॅक्टर हैं जो बस्तर में आकर सेवाएं दे रही हैं। इससे पहले एक भी न्यूरो फिजिशियन यहां स्थायी तौर पर रहने नहीं आया। इसके पीछे कारण यह है कि न्यूरो फिजिशियन्स को महानगरों में निजी और सरकारी हॉस्पिटलों में बड़ा पैकेज मिलता है। लेकिन अफरोज फातिमा और उनके पति ने पैसों को नहीं, सेवा को चुना और वे अब बस्तर के हो गए। अफरोज बताती हैं कि उनके कुछ परिचित डाॅक्टरों ने बस्तर की स्थिति को बताया था यह भी बताया था कि आंखों के ऑपरेशन और न्यूरो संबंधी इलाज के लिए लोगों को तीन सौ किमी जाना करना पड़ता है। इसके बाद से ही मन में था कि हम बस्तर में सेवा दें। इस बीच मौका मिला तो हम दोनों यहीं आ गए।

डॉ. प्रीत कौर: ये हैं बच्चों की डाॅक्टर दीदी, जरूरतमंद मासूमों की मदद करना है इनकी हॉबी
डॉ प्रीत कौर, मेकॉज में ही पढ़ाई की और अब यहीं जेआर हैं। हाल ही में कोविड हॉस्पिटल में 15 दिन तक सेवाएं दीं। अब क्वारेंटाइन पूरा कर अस्पताल लौटी हैं। इनके दिल में जरूरतमंदों के लिए एक अलग जगह है। खाली समय में ये बच्चों को मुफ्त में पढ़ाती हैं और जरूरतमंद बच्चों की मदद भी करती हैं। बच्चों से इनका लगाव इतना कि बच्चे इन्हें डॉक्टर दीदी कहते हैं। प्रीत कहती है कि बच्चे देश के भविष्य हैं। कुछ समय निकालकर बच्चों के साथ बिताने पर एक तो बच्चों को नई दिशा मिलती है और मन को भी तसल्ली होती है।
डॉ. अंजू: एक न्यूरोलॉजिस्ट जो पिस्टल शूटर,कवयित्री और कहानीकार भी हैं

डॉ. अंजू जेपी सिंह धरमुपरा की रहने वाली हैं। स्कूली शिक्षा जगदलपुर में ही पूरी की, छोटे से शहर से निकलकर न्यूरोलॉजी में मास्टर डिग्री की। जितनी बेहतरीन डाॅक्टर हैं उतनी ही अच्छी पिस्टल शूटर। निशाना अचूक हैं। कई प्रतियोगिता जीती हैं। इसके अलावा कविता-कहानियां भी लिखती हैं और खुद सुनाती हैं। ‘यादें विथ अंजू’ नाम से यूटूयूब चैनल भी है। कई मंचों पर कविता पाठ भी कर चुकी हैं। यही नहीं, महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाती हैं। अंजू कहती हैं डाॅक्टरी से हटकर भी एक पूरी दुनिया हैं।



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These are our doctors, who give their lives and live with vigor, some tennis players and some shooter


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