मंदिर खुले और मन्नत लिए पहुंचे भक्त, किसी ने माता को पाती लिखकर बताई मन की बात, किसी ने बांधे मनौती के नारियल, शादी का न्यौता भी दिया
80 दिन के इंतजार के बाद सोमवार को मंदिरों के पट खुले और भगवान ने अपने भक्तों को दर्शन दिया। कई लोग मन्नत लेकर भी पहुंचे थे। किसी ने माता को पाती लिखकर अपने मन की बात पहुंचाई तो किसी ने मठ-मंदिरों में मनौती के नारियल बांधे। बहुत से लोग अपनी शादी का न्यौता लेकर भी पहुंचे थे। हालांकि, इस बार न्यौता सीधे भगवान के चरणों में रखने के बजाय पंडित के हाथों में दिया गया। करीब 8 घंटे तक इन निमंत्रण पत्रों को अलग रखने के बाद भगवान को समर्पित किया गया।
महामाया मंदिर के पुजारी पंडित मनोज शुक्ला बताते हैं, मांगलिक कार्यों का पहला निमंत्रण भगवान को दिया जाता है। आमतौर पर शादी के सीजन में महामाया माता को हर दिन 8 से 10 भक्तों का निमंत्रण आता है। इस बार लॉकडाउन के चलते बहुत सी शादियां टल गईं और जिनकी हुई थी वे मंदिर बंद होने की वजह से माता को निमंत्रण नहीं दे पाए। 80 दिन बाद सोमवार को मंदिर खुला तो कई भक्तों ने मंदिर आकर माता को शादी का न्यौता दिया। बहुत से लोगों ने अपनी मनोकामनाओं को लेकर माता को पत्र भी लिखा। उन्होंने बताया कि इन पत्रों को सीधे माता के चरणों में समर्पित करने के बाद एक अलग रूम में रख दिया जाता है। पत्र में लिखी सारी बातें माता और भक्त के बीच की होती है इसीलिए पत्र को कोई भी खोलकर नहीं पढ़ता।
दक्षिणमुखी हनुमान - दीवार पर बांधतेहैं नारियल, मन्नत पूरी होने पर फोड़ते हैं
दूधाधारी मठ में दक्षिणमुखी हनुमान का मंदिर है। सोमवार को मठ खुलते ही कई भक्त इस मंदिर की दीवार पर मनौती के नारियल बांधने पहुंचे। महंत रामसुंदर दास बताते हैं कि हर साल यहां की दीवारों पर 5 हजार से ज्यादा नारियल बांधे जाते हैं। जिनकी मनोकामना पूरी हो जाती है वे मठ आकर नारियल फोड़वा देते हैं। यह परंपरा करीब साढ़े 5 सौ साल पुरानी है। रामछवि दास ने बताया कि पहली बार नागपुर के भोसले राजा ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यहां मन्नत के नारियल बांधे थे। उनकी मनोकामना पूरी भी हुई। तभी से यहां नारियल बांधे जा रहे हैं। न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां नारियल बांधने आते हं। मन्नत पूरी हो जाती है तो वापस आकर दीवार से नारियल उतारते हैं और तोड़कर चले जाते हैं।
मंदिर खुलने पर सीएम हाउसमें 31 ब्राह्मणों ने किया शंखनाद

प्रदेशभर के 55 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े मंदिर अब खुल गए हैं। फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा-अर्चना शुरू हो गई ह। इस खुशी में सोमवार को विधायक विकास उपाध्याय के नेतृत्व में 31 ब्राह्मणों ने सीएम हाउस में शंखनाद किया। साथ ही मंदिरों को खोलने की अनुमति देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आभार जताया। इस दौरान सीएम ने सभी ब्राह्मणों को 11-11 सौ रुपए की दक्षिणा भी दी। साथ ही उन्होंने संक्रमण से बचाव के लिए मंदिरों में सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन कराने की अपील भी की।
नीलकंठेश्वर महादेव - अर्जी पहुंचानेनंदी के कान में कही मनोकामना
यह तस्वीर नहरपारा स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर की है। यहां भी भक्त मनोकामना लिए पहुंचे। पर यहां अर्जी पहुंचाने के लिए भक्तों ने पत्र या नारियल के बजाय नंदी की मदद ली। मान्यता है कि नंदी के कानों में अपनी मनोकामना कही जाए तो वह सीधे शिवजी तक पहुंचती है। पं. नीलकंठ त्रिपाठी बताते हैं नंदी भगवान शिव के प्रमुख गणों में से एक हैं। कहा जाता है नंदी पूर्व में शिलाद ऋषि थे, जिन्होंने हजारों वर्षों तक घोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया फिर उनसे वरदान पाया कि वे सदैव उनके साथ रहेंगे। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें अपने वाहन के रूप में सदैव साथ रखने का वचन दिया। तभी से वे नंदी के रूप में शिवजी के साथ रहते हैं। शिवजी का दूत होने की वजह से नंदी से मनोकामना कही जाती है।
काली मंदिर - वरूण यज्ञ किया ताकि प्रदेश में हो अच्छी बारिश
इधर, आकाशवाणी चौक स्थित मां महाकाली मंदिर में प्रदेश में अच्छी बारिश की कामना से वरूण यज्ञ किया गया। इस दौरान पूरे विश्व को कोरोना से मुक्ति दिलाने के लिए प्रार्थना भी की गई। भाजपा किसान मोर्चा की ओर से इस यज्ञ का आयोजन किया गया था। इस दौरान पूर्व कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू, भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास, अंजय शुक्ला, अजय साहू, उदय कोटेचा, ओमेश बिसेन मौजूद रहे।
आज खुलेगा खाटू श्याम मंदिर
खाटू श्याम मंदिर सोमवार को बंद रहा। सचिव बिनय बजाज ने बताया कि मंदिर मंगलवार से भक्तों के लिए खोला जाएगा। यहां आने वाले सभी भक्तों को सरकारी नियमों का पालन करना होगा। फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ मंदिर में प्रवेश करना है। दर्शन करने के बाद रुकना मना है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3cOQOrv
via
Comments
Post a Comment