भूख मिटाने के लिए सबसे बड़ी जरूरत अनाज की है। सारी जद्दोजहद इसी के लिए है। सरस्वती शिशु मंदिर स्थित क्वारेंटाइन सेंटर में स्थिति एकदम उलट है। यहां चावल के पैकेटों का पहाड़ कई दिनों से लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि 195 श्रमिकों के लिए सुबह शाम इतना ज्यादा चावल, सब्जी भेजी जा रही है, लोग फेंक रहे हैं। गुजरात से लौटे मस्तूरी क्षेत्र के मजदूरों को 24 मई से यहां क्वारेंटाइन किया गया है। वहीं इसी विकासखंड के चिस्दा कन्याशाला के क्वारेंटाइन सेंटर में 60 लोगों के लिए मात्र 5 किलो चावल भेजा जा रहा है। भूख से बेचैन श्रमिकों ने मंगलवार को वहां प्रदर्शन किया। दोनों स्थितियों के बारे में मस्तूरी एसडीएम मोनिका मिश्रा से पूछने पर उन्होंने बताया कि भोजन की व्यवस्था प्रशासन ने की है। उन्हें आज ही पता लगा है कि कुछ सामाजिक संगठन भी वहां खाना भेज रहे हैं। ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों से पूछा जाएगा कि आखिर अधिक खाना आ रहा है, तो उसे बंद क्यों नहीं कराया? चिस्दा क्वारेंटाइन सेंटर में भोजन की कमी के बारे में सीईओ से जानकारी लेंगे। व्यवस्था में खामियां हैं, तो उसे दुरुस्त किया जाएगा।
फोटो: सूर्यकान्त चतुर्वेदी
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