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कोरोना की आड़ लेकर दिव्यांग बुजुर्ग मां-बाप को सड़कों पर छोड़ रहे कपूत

अमिताभ अरुण दुबे | मार्च और मई के बीच शहर में चार लॉकडाउन की आड़ में कुछ लोगों ने अपने घर के बुजुर्गों को सड़क पर बेसहारा छोड़ दिया। कोई स्कूटी से तो कोई बोलेरो से अपने माता-पिता को सड़क पर छोड़कर चला गया। ये लोग ठीक से नाम और पता तक नहीं बता पा रहे हैं। चारों लॉकडाउन के दौरान समाज कल्याण विभाग ,जिला पुलिस-प्रशासन और स्मार्ट सिटी की टीमों ने टाटीबंध और शहर के आसपास ऐसे छोड़े गए करीब सत्तर लोगों को रेस्क्यू किया। आमानाका में पदस्थ टीआई भरत बरेठ ने टीमें लगाकर इनके परिजनों के बारे में तलाश भी की।

राजधानी के एक ज्वेलर ने अपनी मां को घर से निकाल दिया था। जब ये बुजुर्ग बेसहारा लोगों के लिए खाने की लाइन में मिली तो प्रशासन के दखल के बाद ज्वेलर ने माफी मांगकर मां को घर लेकर गया। इनमें तो कुछ ऐसे दिव्यांग भी हैं जो देख तक नहीं पाते।

अस्पताल के पास रहने की जिद कर रही जांजगीर चांपा की बुजुर्ग
लॉकडाउन के दौरान डॉक्टर अंबेडकर अस्पताल के पास करीब 65 साल की बुजुर्ग महिला मिली। ये खुद को जांजगीर चांपा की बताती हैं। इस बुजुर्ग महिला को भी लालपुर के रेस्क्यू कैंप में रखा गया था। 14 दिन के आइसोलेशन पीरियड के बाद फिलहाल ये एक सामाजिक संस्था के आश्रय स्थल में रह रही हैं। लेकिन अभी भी डॉक्टर अंबेडकर अस्पताल के पास ही रहने की जिद करती है। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें जांजगीर चांपा भिजवा देते हैं, लेकिन वो भी अब घर नहीं जाना चाह रही है। कहती है सड़क पर ही सुकून से रहूंगी।

केस 1 | नब्बे साल के बुजुर्ग को तालाब के किनारे छोड़ा, अभी अस्पताल में

डंगनिया तालाब के किनारे नब्बे साल के बुजुर्ग को बीमार हालात में बोलेरो से चौथे लॉकडाउन के वक्त छोड़कर परिजन चले गए। नब्बे साल के बुजुर्ग अपना नाम पता तक नहीं बता पाए, इस बात को करीब पंद्रह दिन हो चुके हैं। जिला प्रशासन की देखरेख में बुजुर्ग का फिलहाल शहर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं घर से इस तरह बुजुर्ग को निकालने वालों की तलाश सरगर्मी से की जा रही है।
केस 2 | इलाहाबाद के लिए टाटीबंध में छोड़कर चले गए 73 साल के शख्स को

31 मई को चौथे लॉकडाउन के दिन टाटीबंध में जहां श्रमिकों की आवाजाही के लिए कैंप लगाया गया है। वहां किसी ने स्कूटी से आकर 73 साल के तुरंत नारायण ओझा को छोड़ दिया। पूछताछ में पता चला कि ये इलाहाबाद जाना चाहते हैं। इनके पास से यूपी के ग्रामीण बैंक की पास बुक भी मिली है। इसमें दिए पते के आधार पर प्रशासन उनके बारे में पता कर रहा है। फिलहाल इन्हें 14 दिन के आइसोलेशन में रखा गया है।
केस 3 | मुंबई से आए दिव्यांग बुजुर्ग को शहर में मिला ठिकाना

दूसरी तालाबंदी के दौरान मुंबई से आए एक दिव्यांग बुजुर्ग राजधानी के घड़ी चौक में मिले। पूछताछ में पता चला कि घर वालों ने एक ट्रक में बैठा दिया था। लालपुर के शेल्टर होम में इन्हें 14 दिन तक रखा गया था। फिलहाल ये बुजुर्ग एक आश्रय स्थल में रह रहे हैं। जिला प्रशासन की टीम को इस बुजुर्ग ने कहा कि अब मैं वापस घर नहीं जाऊंगा, क्योंकि घर वालों ने मुझे ट्रक में बैठाकर क्यों छुड़वाया अभी तक समझ नहीं पा रहा हूं।
केस 4 | रायपुर में बच्चों ने मां को घर से निकाला, कहा- भीख मांगो और खाओ

ये कहानी रायपुर के रावाभाठा इलाके में रहने वाली 70 साल की बुजुर्ग महिला की है। इसके दो बच्चे हैं, एक नागपुर में और दूसरा रायपुर में है। ये अपने पति की मौत के बाद बच्चों के साथ रह रही थी। बच्चों ने कहा कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान हम अपना ही परिवार नहीं पाल पा रहे हैं, तुम्हारे लिए कहां से लाएं। तुम अब भीख मांगो और खाओ। इस महिला के पति रेलवे में थे। महिला बदहवास है।

परिजनों की तलाश भी की जा रही है
"पूरे लॉकडाउन के दौरान शहर में ऐसे करीब सत्तर बेसहारा लोग मिले हैं। इनमें से करीब पंद्रह बुजुर्गों को संस्थाओं के आश्रय स्थलों में रखा गया है। परिजनों की तलाश भी की जा रही है।"
-भूपेंद्र पांडे, संयुक्त संचालक, समाज कल्याण विभाग

ऐसे लोगों पर एफआईआर की तैयारी
"बेसहारा हालात में बुजुर्गों ने हमारी संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। आखिर कोई अपने माता पिता को इस तरह कैसे सड़क पर छोड़ सकता है। ऐसे अज्ञात लोगों पर एफआईआर की तैयारी की जा रही है।"
-आशीष मिश्रा, जीएम, कम्यूनिकेशन स्मार्ट सिटी रायपुर



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Disciples leaving elderly parents on the streets under the guise of Corona


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