राजधानी मेें कोरोना का पहला मरीज 18 मार्च को मिला और उसके बाद लगभग दो महीने तक इक्का-दुक्का मरीज मिलते रहे। मई के पहले पखवाड़े यानी 15 मई तक कुल मरीज 67 ही थे। तब जितने भी पाजिटिव केस मिले थे, उन्होंने अपने परिजनों तक को संक्रमित नहीं किया। विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में कोरोना वायरस की कम उपस्थिति के कारण ढाई माह तक हालात काबू में थे, लेकिन 15 मई के बाद संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ने लगी और अारटीपीसीअार की जांच में मरीजों का वायरल लोड भी ज्यादा निकलने लगा। इसी वजह से 29 मई को प्रदेश में कोरोना से पहली मृत्यु हुई। डाक्टरों ने बताया कि पहली मौत के बाद से अब तक वायरल लोड काफी बढ़ चुका है। इसलिए पिछले 15 दिन से रोजाना औसतन 100 मरीज निकल रहे हैं।
प्रदेश में काेरोना से अब तक 13 लोगों की मौत हुई है। इनमें बिरगांव, राजनांदगांव के युवक व भिलाई की महिला को छोड़कर बाकी मरीज कैंसर, टीबी, एचआईवी, निमोनिया व किडनी की बीमारी से पीड़ित थे, यानी 70 फीसदी मौतें ऐसी हैं, जिनमें मरीज को दूसरी बीमारियां ही थीं। भास्कर ने विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने वायरल लोड बढ़ने को लेकर चौंकाने वाली जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि बिरगांव का 37 वर्षीय युवक फैक्ट्री में बेहोश होकर गिरा था, जिससे ब्रेन में हल्की चोट थी और मामूली सर्दी भी थी। उसमें कोरोना का संक्रमण मिला और तीन दिन में मृत्यु हो गई।
चरोदा भिलाई की 64 वर्षीय महिला की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं थी, लेकिन उसमें भी वायरल लोड ज्यादा था तथा दूसरी बीमारी भी नहीं थी, फिर भी कोरोना से मृत्यु हुई। बिलासपुर के दो, दुर्ग के दो, धमतरी, जगदलपुर, रायगढ़ व महासमुंद के एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। ये सभी दूसरी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। धमतरी के 60 वर्षीय जिस व्यक्ति की सोमवार को एम्स में मौत हुई, वह 27 मई से भर्ती था। 20 दिनों बाद उसकी मौत हुई। बाकी मरीजों की मौत 4 से 10 दिनों में हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि दूसरी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए कोरोना का रिस्क ज्यादा रहता है। ऐसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कम रहती है इसलिए कोरोना का हमला नहीं झेल पाते और कुछ दिन में मौत हो जाती है।
शरीर में हजार से ज्यादा वायरस, तो दूसरों को भी खतरा
कोरोना कोर कमेटी के सदस्य तथा चेस्ट एक्सपर्ट डा. आरके पंडा के मुताबिक किसी व्यक्ति में अगर कोरोना के वायरस 1000 हैं, तो वह दूसरे को संक्रमित कर सकता है। कोरोना शरीर में इतनी तेजी से बढ़ता है कि तीन-चार दिन में संख्या लाखों से पार हो जाती है। खांसने या छींकने पर कोई भी व्यक्ति औसतन 2 मिलियन यानी 20 लाख वायरस निकालता है। इसीलिए ज्यादा वायरल लोड होने पर संक्रमण तेजी से फैलता है। अगर कोई व्यक्ति संक्रमित हुअा और जल्दी जांच में यह बात सामने आगई, तो ऐसा व्यक्ति दूसरों के लिए खतरा नहीं होता और घर में भी दवा लेकर स्वस्थ हो सकता है। इसीलिए दिल्ली में बिना लक्षण वाले मरीजों को दवा देकर घर में रहने के लिए कहा जा रहा है।
वायरस का हमला इस तरह
कोराेना का वायरस मुंह, नाक व आंख के माध्यम से शरीर के सेल के भीतर जाकर चिपक जाता है। ये सेल में जाकर अपने जीन की कई गुना वृद्धि करता है, फिर अपना नया रूप बनाकर सेल से बाहर निकलता है। इसलिए संक्रमित लोगों को ऐसी दवा दी जा रही है, जो तीन तरह से वायरस और उसके असर को रोक ले। जिस व्यक्ति के शरीर में कम वायरस जाते हैं, वह देरी से बीमार पड़ता है। जिसमें वायरल लोड ज्यादा होता है, उसकी मौत की अाशंका बढ़ जाती है।
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