सरकारी तंत्र पूरी तरह से कोरोना के इलाज में फोकस होने से बाकी बीमारियों के मरीजों पर आफत आ गई है। अंबेडकर अस्पताल में बच्चों और गर्भवती महिलाओं का इलाज बंद कर दिया गया है। मरीजाें को पंडरी के जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। बीपी और शुगर के पेशेंट भी डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भेजे जा रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों ने मुसीबत और बढ़ा दी है। दांत और आंख का इलाज लगभग बंद है। केवल दांत दर्द का इलाज किया जा रहा है। आंख के स्पेशलिस्ट भी केवल इमरजेंसी केस कर रहे हैं। बड़े प्राइवेट अस्पतालों में बड़ी मुश्किल से अपाइनमेंट लेकर ही एंट्री दे रहे हैं। हार्निया, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट और दांत से जुड़ी सर्जरी निजी अस्पतालों में भी बंद कर दी गई है।
अंबेडकर अस्पताल में कोरोना वार्ड बनाने के कारण यहां से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के विभाग को जिला अस्पताल पंडरी में शिफ्ट किया गया है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को वहीं भेजा रहा है। ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं इसलिए मरीज बीमार बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लेकर सीधे अंबेडकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। भीतर एंट्री करने के बाद उन्हें पंडरी अस्पताल का पता बताया जा रहा है। इसी तरह मेडिसिन विभाग को डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। मरीज ज्यादा होने के कारण यहां बेड खाली नहीं है। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। स्थिति भर्ती करने लायक होने के बावजूद कई मरीजों को केवल बिस्तर खाली नहीं होने के कारण घर भेजा जा रहा है। गायनी व पीडियाट्रिक विभाग का नियोनेटल आईसीयू जिला अस्पताल पंडरी में है। जबकि ओपीडी, आईसीयू व वार्ड मातृ-शिशु अस्पताल में है।
निजी अस्पतालों के कड़े नियम
- बड़े निजी अस्पतालों में फोन पर बीमारी बताने के एक-दो दिन बाद ही एंट्री।
- आंख के अस्पतालों में इमरजेंसी वाले मोतियाबिंद के ऑपरेशन ही किए जा रहे।
- दांत के ज्यादातर अस्पतालों में इलाज की फीस दोगुनी ताकि इमरजेंसी वाले ही पहुंचे।
- गायनी के अस्पताल में फोन पर परेशानी सुनने के बाद डाक्टर एक्स-रे, सोनोग्राफी और ब्लड टेस्ट लिख रहे हैं। उसके बाद जरूरी होने पर ही इलाज के लिए बुलवाया जा रहा है।
- हार्निया, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, दांत निकालने, मसूड़ों की सर्जरी और रेटीना से जुड़ी बड़ी सर्जरी इमरजेंसीन होने पर नहीं की जा रही।
63 साल के बुजुर्ग को लकवा फिरभी अस्पताल में भर्ती ही नहीं किया
छत्तीसगढ़ नगर वार्ड नंबर 58 में रहने वाले रामखिलावन सोनी को उनका बेटा संजय लकवे का अटैक आने के बाद मार्च में तालाबंदी के दौरान अंबेडकर अस्पताल लेकर गया। वहां सीटी स्कैन के बाद उन्हें भर्ती नहीं किया गया। संजय के मुताबिक उस दिन पूरे दिन भर अस्पताल में वे भटकते हुए लगातार कोशिश करते रहे, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी एक नहीं सुनी। वे कहते हैं कि अगर पिता को समय पर इलाज मिला होता तो शायद वे सुधर भी जाते।
बीपी शुगर की जांच तक नहीं कर रहे20 फीट दूर से कहा- बाद में आना
रायपुरा वार्ड क्रमांक- 69 के जयराज सोनी (58 साल) को लो बीपी और हाई शुगर की बीमारी है। जिला अस्पताल पंडरी में उनका पहले से इलाज चल रहा है। हाल ही में तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी पत्नी जब उन्हें अस्पताल लेकर गई। वहां काफी मिन्नतों के बाद डॉक्टर उन्हें देखने के लिए राजी हुए। डॉक्टर ने करीब बीस फीट की दूरी से उन्हें देखा, न ही बीपी जांचा न ही शुगर। बगैर किसी दवा और इलाज के उन्हें अस्पताल से वापस लौटा दिया गया।
जयराज सोनी कहते हैं कि बीपी और शुगर जब हाई रिस्क पर आ गई तो पत्नी उन्हें एक निजी अस्पताल में लेकर गई। यहां बीपी शुगर की जांच समेत पूरे इलाज में उनको साढ़े 8 हजार रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़े। उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है क्योंकि उनके पास कोई रोजगार नहीं।
इन 12 सवालों के जवाबदेने के बाद ही एंट्री
अंबेडकर अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी डीकेएस में शिफ्ट करने के बाद 12 सवालों का सिस्टम लागू कर दिया गया है।
1. क्या आपको खांसी है?
2. क्या आपको सर्दी है?
3. क्या आपको गले में खराश है?
4. क्या आपको सरदर्द है?
5. क्या आपको डायरिया है?
6. क्या मांसपेशियों में जकड़न है?
7. क्या आपको बुखार रहता है?
8. क्या सांस लेने में तकलीफ है?
9. क्या आपको थकान ज्यादा लगती है?
10. पिछले 14 दिन में कोई यात्रा की है?
11. क्या किसी कोविड पेशेंट के संपर्क में आए हैं?
12. क्या कोरोना पीड़ित इलाके में यात्रा की है?
(6 सवाल का जवाब अगर हां में है तो मरीज की पहले कोरोना जांच होती है, यह रैपिड टेस्ट के जरिए भी की जा रही है।)
अंबेडकर में केवल इन बीमारियों का इलाज
अंबेडकर अस्पताल में फिलहाल कार्डियोलॉजी, कार्डियेक सर्जरी, ऑर्थोपीडिक, जनरल सर्जरी, कैंसर, कैंसर सर्जरी, स्किन और मनोरोग विभाग चल रहे हैं। इन बीामरियों के मरीजों को मेडिसिन से संबंधित बीमारी होने पर डाक्टर पहले मेडिसिन के डाक्टर के पास रिफर करते हैं। मेडिसिन विभाग डीकेएस में चल रहा है। ऐसे में मरीजों को अंबेडकर अस्पताल में जांच करवाने के बाद डीकेएस जाना पड़ता है। वहां परीक्षण करवाने के बाद फिर जरूरत पड़ने पर फिर अंबेडकर अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
सर्जरी भी केवल इमरजेंसी केस में
- ऑर्थोपीडिक- सड़क हादसे में घायलों सर्जरी। हल्का फ्रैक्चर व रूटीन केस बिल्कुल नहीं
- जनरल सर्जरी- केवल पेट व ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी। हार्निया व दूसरी सर्जरी नहीं।
- कार्डियेक सर्जरी- फेफड़े, खून की नसों की ही बड़ी सर्जरी डॉक्टर कर रहे।
- स्किन- ओपीडी में मरीजों की जांच और इलाज नियमित रूप से चल रहा।
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