स्नान पूर्णिमा में खूब नहाने के बाद बीमार पड़े भगवान जगन्नाथ इन दिनों स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। 15 दन तक गर्भगृह से अलग वे दूसरे भवन आयुर्वेदिक औषधि से बना काढ़ा पी रहे हैं। बीमार महाप्रभु अनसर भवन में आंख बदं करके उल्टे लेटे हुए हैं। उन्हें अब पारंपरिक भोजन का भोग भी नहीं लगाया जा रहा। वे केवल सुबह-शाम काढ़ा पीकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
बीमार महाप्रभु को जल्द से जल्द स्वस्थ करने के लिए इन दिनों उन्हें गर्म चीजें पिलाई जा रही हैं। पुजारियों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ नहाने के बाद बीमार पड़ गए थे और अनसर काल में चले गए हैं। इन दिनों उनको जो काढ़ा पिलाया जा रहा है उसकी तासीर काफी गर्म है। पुजारियों ने बताया कि काढ़ा बनाने में चिरायता, काली मिर्च, लौंग, इलायची, पपली जड़ी, छुआरा, काजू, किशमिश, बादाम का उपयोग किया जाता हैं। इन सभी को पीसकर इसे काढ़ा बनाकर पिलाया जा रहा है । भगवान को पिलाए जाने वाले इस काढ़े को प्रसाद के रूप में लेने के लिए भी भक्त जगन्नाथ मंदिर में पहुंच रहे हैं।
तीन परिवार पीढ़ियों से दायित्व निभा रहे हैं
अनसर काल में भगवान को काढ़ा पिलाए जाने की परंपरा का पालन तीन सेवादारों की पीढियां सालों से कर रही है। इस समय यह दायित्व, अरूण पाढ़ी, योगेश मंडन और भूपेंद्र जोशी पूरा कर रहे हैं। अरूण पाढ़ी ने बताया कि उनका परिवार यह दायित्व 1914 से पूरा करता आ रहा है। उनके पिता की तबियत ठीक नहीं होने से इस काम की जिम्मेदारी उनको मिली है, जिसे वह पूरा कर रहे हैं।
15 दिनों तक महाप्रभु रहेंगे बीमार
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि 15 दिनों तक महाप्रभु बीमार रहेंगे। सामान्य तौर पर जिस तरह एक बीमार व्यक्ति को दवा खिलाकर उसका उपचार किया जाता है। उसी तरह भगवान जगन्नाथ का उपचार इन दिनों काढ़ा पिलाकर किया जा रहा है। पुजारियों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ को स्वस्थ करने के लिए के लिए सेवादारों के द्वारा जो सेवा की जाती है उसके बारे में किसी को नहीं बताया जाता है।
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