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बोधघाट परियोजना का विरोध नहीं मगर सरकार ग्राम पंचायत से बात करें

36 साल पहले की अटकी बोधघाट परियोजना शुरू कराने कवायद चल रही है। अफसरों की टीम भी गुपचुप तरीके से सर्वे पर आकर चली गई और डूबान क्षेत्र में आने वाले गांवों के ग्रामीणों को खबर तक नहीं लगी। बड़े प्रोजेक्ट के लिए जिस क्षेत्र में काम होना है, वहां न तो ग्राम सभा हुई, न ग्रामीणों से किसी तरह की चर्चा।
4 जिलों के जितने भी गांव प्रभावित होने हैं, वहां के ग्रामीणों में रोष है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट का काम शुरू होने को है लेकिन सरकार ने प्रभावित होने वाले, डूबान क्षेत्र में आने वाले ग्रामीणों से बातचीत तक नहीं की। गुरुवार को बारसूर के हितामेटा में करीब 15 से ज्यादा गांवों के सरपंचों, ग्रामीणों ने बैठक की और इस बारे में चर्चा की। ग्रामीणों ने कहा बोधघाट परियोजना का विरोध कतई नहीं है, लेकिन सरकार हमसे बातचीत तो करे। सर्वे का काम शुरू हो गया, टीम आकर चली गई और ग्रामीणों को जानकारी तक नहीं दी गई। ये गलत है। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य बैसूराम मंडावी, बेंगलूर सरपंच सुकमन कश्यप, भटपाल सरपंच पालराम कश्यप, कौशलनार जनपद पंचायत सदस्य सायबो लेकामी, हितामेटा सरपंच रैतुराम मंडावी, मंगनार सरपंच मनकुराम कश्यप, ककनार सरपंच नारायण सेठिया, कौशलनार सरपंच मंगलू ओयाम आदि ग्रामीण थे।

ये गांव होंगे प्रभावित: ग्रामीणों ने डूबान क्षेत्र में आने वाले गांवों की सूची उपलब्ध कराई है। इनमें बोदली, हर्राकोरेड, बेज्जा, करेकोट, सूलेंगा, पालम, धर्माबेदा, ककनार, चंदेला, बिनता , तुमरीवाड, कुदूर, भटपाल, बेंगलूर सहित 24 ग्राम हैं।



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Bodhghat project is not opposed but government should talk to gram panchayat


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