ये कटुलनार के नवदंपती संतोष पैगड़ और असन्ती है। संतोष देख नहीं सकता। जबकि असन्ती पूरी तरह से स्वस्थ्य। अनलॉक 1.0 में दोनों ने शुक्रवार को सात फेरे लिए। इनकी कहानी भी फिल्मी कहानी की तरह बेहद रोचक है। बेलनार की रहने वाली असन्ती कटुलनार में अपने रिश्तेदारों के घर आती थी। बचपन में संतोष व असन्ती दोनों साथ खेलते। संतोष उस वक्त देख सकता था। आठवीं पढ़ते वक्त संतोष के आंखों की रोशनी चली गई, तब भी असन्ती ने संतोष का साथ नहीं छोड़ा। करीब 4 साल पहले दोनों ने प्रेम का इजहार किया। बात परिवार को पता चली, अच्छी बात ये कि असन्ती के परिवार ने दोनों के प्रेम को नकारा नहीं, बल्कि सम्मान किया।
ये समानता का एक बड़ा उदाहरण: अफसर
समाज कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर संतोष टोप्पो ने कहा कि असन्ती ने दृष्टिबाधित संतोष से शादी कर समानता का एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। किसी भी दिव्यांग को दिव्यांग की दृष्टि से न देखें, क्योंकि वह भी एक इंसान है। निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप इन्हें प्रोत्साहन राशि ज़रूर मिलेगी। संतोष ने भास्कर से चर्चा में कहा कि आंखें चली जाने के बाद परिवार बसाने की उम्मीदें ही मैंने छोड़ दी थी, लेकिन असन्ती ने मेरा साथ नहीं छोड़ा। पत्नी की आंखों से मैं रंगीन दुनिया का अहसास करूंगा। असन्ती दिव्यांगों की संस्था में खाना बनाकर पैसे कमाती है।
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