मोहम्मद इमरान नेवी | मेडिकल कॉलेज के बायोकेमेस्ट्री डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार का खेल नीचे से लेकर उपर तक चल रहा है। भ्रष्टाचार का खेल आसानी से चलता रहे इसलिए डिपार्टमेंट में पूरा सेटअप ही एमसीआई के नियमों को ताक पर रखकर दिया गया है। डिपार्टमेंट के एचओडी द्वारा अपनी ही फैक्ट्री से बने केमिकल की सप्लाई की शिकायत की जांच के बीच इस मामले में एक नया खुलासा हुआ है। डिपार्टमेंट में जिस एचओडी के खिलाफ अपनी फर्म से सप्लाई का आरोप है वह डॉक्टर ही नहीं है। उसने बायोकेमेस्ट्री में एमएससी की है और इसके बाद पीएचडी कर ली। वह लंबे समय तक बिलासपुर के सिम्स हास्पिटल में तैनात रहा। इसके बाद उसका ट्रांसफर मेकाॅज में हो गया। इसी बीच उसे अचानक ही बायोकेमेस्ट्री डिपार्टमेंट का एचओडी बना दिया गया, जबकि एमसीआई का नियम है कि मेडिकल कॉलेज के किसी भी डिपार्टमेंट का हेड एमडी डॉक्टर होना चाहिए।
बायोकेमेस्ट्री डिपार्टमेंट में एक एमडी बायोकेमिस्ट भी है, लेकिन उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर बनाकर रखा गया है और उनसे सिर्फ रिपोर्ट में साइन करवाने का काम लिया जा रहा है। इसके अलावा एमसीआई का एक नियम यह है कि डिपार्टमेंट में डॉक्टर यानी कि कम से कम एमबीबीएस डिग्री होल्डर और एमएससी किए हुए लोगों का रेसीयो 50-50 का होना चाहिए, लेकिन इसका पालन भी इस डिपार्टमेंट में नहीं किया जा रहा है। डिपार्टमेंट में जितने भी डेमोंस्ट्रेटर हैं वे एमएससी होल्डर हैं।
अभी डिपार्टमेंट में एक एचओडी, एक एसोसिएट प्रोफेसर और चार डेमोंस्ट्रेटर हैं। इनमें से सिर्फ एक ही डॉक्टर है। बताया जा रहा है कि यह पूरा सेटअप ही इसलिए ऐसा बनाया गया है ताकि केमिकल सप्लाई का खेल आसानी से जारी रहे और इसकी भनक किसी को न लगे।
जांच दल में मेकाॅज के ही डॉक्टर
इधर मेकाॅज के डीन यूएस पैंकरा का कहना है कि इस मामले में जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन कर दिया है। जांच की जिम्मेदारी मेकाॅज के डॉक्टरों को ही दी गई है। इस मामले में मेकाॅज प्रबंधन से जुड़े कई बड़े अफसर भी संदेह के दायरे में हैं। ऐसे में अब जांच की इस पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। दरअसल मेकॉज के डॉक्टर अपने ही उपर के अफसरों के खिलाफ रिपोर्ट कैसे बनाएंगे, यह बड़ा सवाल है।
सप्लाई कम और बिलिंग ज्यादा की
इधर केमिकल सप्लाई के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे कई नए खुलासे हो रहे हैं। मेकॉज सूत्रों की मानें तो डिपार्टमेंट में केमिकल की जो सप्लाई होती थी उसकी मात्रा बेहद कम थी, जबकि बिलिंग सप्लाई की गई मात्रा से चार गुना ज्यादा की होती थी। हालांकि अभी इस मामले में मेकाॅज के तीन सदस्यीय दल जांच कर रहा है और जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी। बताया जा रहा है कि डिपार्टमेंट के डेमोंस्ट्रेटर भी एचओडी के फर्म में काम करने जाते थे।
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