मानसून आते ही कोटरी नदी में रेत का अवैध खनन तेज हो गया है। रेत माफिया बारिश के दौरान ऊंचे दामों पर रेत बेचकर भारी मुनाफा कमाते हैं। इसके चलते मानसून के दस्तक के साथ ही रेत निकाल कर जगह-जगह स्टॉक करने में लगे हैं। वहीं बारिश में निर्माण कार्य भी न रुके, इसके लिए रेत का स्टाॅक करना शुरू कर दिया है। इसके चलते रेत की मांग अधिक बढ़ गई है। ऐसे में रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर रेत का अवैध खनन किया जा रहा है। इस अवैध कारोबार को प्रशासन नहीं रोक पा रहा।
ग्राम परतापुर के पास से बहने वाली कोटरी नदी घाट अवैध रेत उत्खनन का मुख्य अड्डा है। यहां से रोज सैकड़ों ट्रैक्टर रेत निकाली जा रही। शासन की ओर से क्षेत्र में रेत उत्खनन के लिए कोई लीज जारी नहीं की गई है। ऐसे में क्षेत्र में रेत का अवैध खनन ही होता है। इसे रोकने के लिए न ही खनिज विभाग के अधिकारी और न ही स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई की जा रही है। एक साल पहले पखांजूर तहसीलदार ने इस अवैध उत्खनन को रोकने के लिए अभियान चलाया था और सुबह परतापुर घाट पहुंचकर 15 से अधिक ट्रैक्टर को रेत भरते रंगे हाथ पकड़ा था। उनका यह अभियान एक बार में ही ठंडा पड़ गया। इसके बाद कुछ दिनों रेत का अवैध उत्खनन बंद रहा और अब फिर स्थिति जस की तस हो गई।
अफसर बोले - अवैध खनन पर कार्रवाई की जाएगी
मानसून आते ही अवैध रेत उत्खनन में काफी तेजी आ गई है। रेत माफिया अधिक मुनाफा कमाने के लिए अभी से रेत का स्टॉक करने में जुट गए हैं। बारिश के दौरान नदी से रेत नहीं निकल पाता। इस दौरान रेत को मनमाफिक दामों में बेचकर माफिया भारी मुनाफा कमाते हैं। इस मामले में खनिज अधिकारी कांकेर प्रमोद कुमार नायर ने कहा कोटरी नदी में रेत खनन का कोई ठेका नहीं दिया गया है। अगर रेत का अवैध खनन हो रहा है तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
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