उद्यानिकी कॉलेज के वैज्ञानिक किसानों की आय बढ़ाने पिछले कई सालों से हल्दी और काॅफी की खेती करवा रहे हैं। इसमें से अब तक हल्दी का उत्पादन तो बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया गया है और काॅफी में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने का फायदा यहां के किसानों को नहीं मिल रहा था। बाजार में मांग नहीं होने के चलते इसे कम दामों पर बेचा जा रहा था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। उद्यानिकी कॉलेज के द्वारा इन दिनों हल्दी की खेती बिहान योजना के तहत भूमगादी महिला कृषक कंपनी और काॅफी की खेती खुद वैज्ञानिक किसानों की मदद लेकर कर रहे हैं। अब इस हल्दी और काॅफी को आने वाले दिनों में ओडिशा के साथ ही झारखंड और दिल्ली में बेचने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
वैज्ञानिक केपी सिंह ने कहा कि कालेज खुद के माध्यम से किसी फर्म को हल्दी और काॅफी नहीं बेच सकता है इसके लिए एमओयू करना होता है। इसके लिए झारखंड की दिवावी कंपनी और दिल्ली की ई गवर्नेंस कंपनी से बात की गई थी। दोनों कंपनियां यहां से हल्दी और काॅफी खरीदने के लिए स्वीकृति दे दी है अब केवल एमओयू बचा हुआ है जिसकी तैयारी की जा रही है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले कलेक्टर रजत बंसल ने दरभा में की गई काॅफी की खेती को देखा था जहां उन्होंने उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ केपी सिंह और बागान मालिक से कॉफी की मार्केटिंग कर इसे खुले बाजार में बेचने के लिए कहा था। जिस पर सिंह ने कलेक्टर से कॉफी की बिक्री दूसरे राज्यों में किए जाने के लिए कंपनियों से बात चलने की जानकारी दी थी।
कैंसर के उपचार में फायदेमंद है जैविक हल्दी
बस्तर में किसानों के द्वारा की जाने वाली रोमा जैविक हल्दी में कैंसर रोधी गुण है। इस हल्दी में पाया जाने वाला करकुमिन तत्व अन्य देशों की तुलना में काॅफी ज्यादा है। यहां की हल्दी में करकुमिन 7.1 फीसदी है। जबकि अन्य राज्यों में यह 1.5 से लेकर 4 फीसदी है। हल्दी की खरीदी के लिए किसानों से संपर्क किया जा रहा है। उद्यानिकी वैज्ञानिक जीपी नाग ने बताया कि यह हल्दी बाजार में 250-300 रुपए किलो के रेट पर बेची जा रही है। बाहर इसे और महंगे दाम पर बेचा जाएगा जिसका फायदा यहां के किसानों को मिलेेगा। ज्ञात हो कि जैविक तरीके से हल्दी की खेती इस समय बास्तानार के तुरांगुर, पीरमेटा, लालागुड़ा, दरभा के कोएनार, सेड़वा और बस्तर के बड़े चकवा, मधोता में की जा रही है। किसानों से खरीदने के बाद इसकी प्रोसेसिंग कालेज में की जा रही है। बस्तर में रोमा वेरायटी की हल्दी की खेती के लिए यह बीज 2016-17 में ओडिशा के पोटांगी से लाया गया था। 5900 रुपए प्रति क्विंटल के रेट पर खरीदी गई इस हल्दी को उद्यानिकी कालेज के द्वारा किसानों को सात क्विंटल प्रति एकड़ के आधार पर प्रदर्शन योजना में मुफ्त में दिया गया था।
नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट में बेचेंगे हल्दी-कॉफी
झारखंड की डिवावी कंपनी की सीईओ और फाउंडर दिवाकी मुखर्जी ने कहा कि बस्तर की जैविक हल्दी और काॅफी को खरीदने के लिए एमओयू को लेकर तैयारी की जा रही है। इसे वहां से खरीदकर वेबपोर्टल के माध्यम से नेशनल और इंटरनेशनल बाजार में बेचा जाएगा। उन्होंने कहा कि कपंनी के द्वारा खरीदी किए जाने से इसका फायदा बस्तर के किसानों को मिलेगा।
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