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अस्पताल में मरीजों की संख्या आधी हुई, फोन पर ही ले रहे परामर्श

जब से कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ है तब से लोग इलाज कराने अस्पताल पहुंचने से परहेज करने लगे हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि सामान्य दिनों की अपेक्षा कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद से जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या घटकर आधी हो गई है। छोटी मोटी बीमारी के लिए लोग या तो घरेलू उपचार कर रहे हैं या फोन पर ही डाॅक्टरों से परामर्श लेकर दवा ले रहे हैं।
कोरोना संक्रमण से पहले सामान्य दिनों में जिला अस्पताल के ओपीडी में औसतन रोजाना 350 से 400 मरीज पहुंचते थे। लाॅकडाउन के बाद से यह संख्या घटकर 150 से 200 हो गई है। आंकड़ों के अनुसार रविवार अवकाश के कारण सोमवार को जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ अधिक रहती है। अब तो सोमवार को भी अधिक भीड़ मरीजों की नहीं पहुंच रही है। इस वर्ष जनवरी में 7525 मरीज इलाज कराने जिला अस्पताल के ओपीडी पहुंचे थे। फरवरी में 7522 मरीज तो मार्च में 7646 मरीज इलाज कराने पहुंचे थे। मार्च के अंत से कोरोना का कहर शुरू हुआ तो जिला अस्पताल के ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या आधी हो गई। अप्रैल में 4866 तो मई में 4,004 मरीज ही इलाज कराने ओपीडी पहुंचे। अप्रैल तथा मई में गर्मी अपने पूरे शबाब पर रहती है। इस दौरान लू आदि के मरीज बढ़ते हैं, जिससे अस्पताल में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों से और बढ़ जाती है, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से संख्या घट गई।
वीडियो कालिंग पर ले रहे परामर्श : कोरोना संक्रमण के चलते ज्यादा तबीयत खराब नहीं होने की स्थिति में फोन से ही छोटी मोटी बीमारी के लिए लोग अस्पताल पहुंचने के बजाए डाॅक्टरों से मोबाइल पर संपर्क कर परामर्श ले रहे हैं। बहुत से मरीज तो वीडियो काल कर डाॅक्टरों से परामर्श ले रहे हैं।
आयुष पाली क्लीनिक में दरवाजे के पास ही जानकारी लेकर कर रहे इलाज : आयुष पाली क्लीनिक में भी मरीजों की संख्या घटी है। पहले एक दिन में 60 से 70 लोग इलाज कराने पहुंचते थे, लेकिन वर्तमान में 30 से 40 मरीज ही पहुंच रहे हैं। मरीज अब सीधे डाॅक्टरों के पास नहीं जा पाते। दरवाजे पर ही रस्सी बंधी है। रस्सी के दूसरे ओर ही मरीजों को रुकना पड़ता है तथा डाॅक्टर वहीं से मरीज से जानकारी लेकर इलाज कर रहे हैं।

डॉक्टरों ने बताया- पहले थोड़ी सी तकलीफ पर अस्पताल पहुंचते थे लोग पर अब नहीं
जिला अस्पताल में पदस्थ हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. लोकेश देव ने कहा पहले लोग थोड़ी सी तकलीफ होने पर भी अस्पताल पहुंच जाते थे। अब थोड़ी तकलीफ होने पर फोन पर परामर्श लेने लगे हैं। जिला अस्पताल में पदस्थ डाॅ. प्रीति पैकरा, डाॅ. सरिता कुमेटी ने कहा हमेशा मास्क लगाकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते इलाज कर रहे हैं। आयुष पाली क्लिनिक में पदस्थ डाॅ. एचएस विनोद ने कहा पहले की अपेक्षा अब अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में कमी आई है।



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आयुष पाली क्लिनिक में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते मरीज।


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