नक्सलियों ने जिले में स्थित तेंदूपत्ता के दो गोदामों में आग लगाने की वारदात करने के आठ दिन बाद बुधवार रात जिले की सीमा से लगे महाराष्ट्र के ग्राम गट्टा में वन विभाग के दफ्तर को आग लगा दी। इससे पहले नक्सलियों ने वहां तैनात दो गार्ड की लात-घूंसे और डंडे से जमकर पिटाई की। दफ्तर में रखे विभाग के जीपीएस उपकरण और अन्य सामानों को लूट लिया। आगजनी में दस्तावेज और फर्नीचर जल गए। वहां रखी बाइक भी जल गई। तंदूपत्ता सीजन में नक्सली वनविभाग कार्यालय, गोदाम व वनकर्मियों को अपना निशाना बना रहे हैं। सप्ताहभर में नक्सलियों द्वारा की गई आगजनी की यह तीसरी घटना है। इसे गट्टा दलम के 40 से अधिक नक्सलियों ने अंजाम दिया है।
कांकेर जिले की सीमा से मात्र 10 किमी दूर महाराष्ट्र के गट्टा जांबिया थानांतर्गत नक्सलियों ने 9 जून की रात 10 बजे जमकर उत्पात मचाया। गट्टा के वन विभाग कार्यालय में 40 से अधिक हथियारबंद नक्सली पहुंचे। कार्यालय में मौजूद दो गार्ड जमकर पीटा। इसके बाद दोनों को बाहर निकाल कार्यालय में आग लगा दी। दोनों गार्ड को चोटें आईं हैं। आग लगाने से पहले कार्यालय में रखे जीपीएस उपकरण तथा अन्य सामानों को लूट लिया। घटना के बाद नक्सली भाग गए। घटना को अंजाम देने के बाद पुलिस के दबाव के कारण अपने इलाके को छोड़कर नक्सलियों के कांकेर आने की आशंका भी बढ़ गई है।
पहले भी दबाव बढ़ने पर लाखों रूपए लेकर कांकेर आए थे ठेकेदार : महाराष्ट्र पुलिस ने तीन साल पूर्व तेंदूपत्ता सीजन के दौरान मुहिम चलाकर कांकेर जिले के बार्डर में महाराष्ट्र में एक करोड़ रूपए से अधिक रकम पकड़ी थी। इस घटना के बाद दबाव बढ़ने पर महाराष्ट्र के तेंदूपत्ता ठेकेदारों द्वारा कांकेर जिले में पहुंच नक्सलियों को रकम पहुंचाने कोशिश की जा रही थी। सूचना मिलने पर कांकेर पुलिस ने 27 मई 2017 को महाराष्ट्र के एक तेंदूपत्ता ठेकेदार से कुल 78.73 लाख रूपए जब्त किए थे। दो अलग अलग जगह से बरामद उक्त रकम में कोयलीबेड़ा के सुलंगी में इनोवा क्रमांक एमएच 35 पी 5127 से 27.43 लाख रूपए जब्त किए गए थे। तेंदूपत्ता ठेकेदार भी बैठा था। इसके बाद पीवी 81 के एक सामाजिक भवन में छुपाकर रखे गए 51. 30 लाख रूपए जब्त किए गए थे।
नक्सली ऐसी वारदात कर ठेकेदारों को देते हैं चेतावनी
नक्सलियों द्वारा तेंदूपत्ता को आग लगाने का कारण ठेकेदार को नुकसान पहुंचाते हुए उसे चेतावनी देना है। नक्सल इलाकों में काम करने के लिए ठेकेदार नक्सलियों से सांठगांठ करते हैं। किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाने के एवज में नक्सलियों तक किसी स्थानीय माध्यम से लेवी के रूप में भारी भरकम रकम पहुंचाई जाती है। रकम समय पर न पहुंचे तो नक्सली ऐसी वारदात कर चेतावनी देते हैं। वर्तमान में कांकेर पुलिस ने मुहिम चला नक्सलियों के शहरी नेटवर्क तथा उन तक रकम पहुंचाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इससे नक्सलियों तक रकम पहुंचाने वाले दहशत हैं। अब वे नक्सलियों तक रकम पहुंचाने से कतराने लगे हैं। ठीक सीजन के दौरान शहरी नेटवर्क का खुलासा होने व नक्सलियों तक पैसा नहीं पहुंचने के कारण बौखलाहट में वे लगातार आगजनी को अंजाम दे रहे हैं।
कांकेर में एक ही दिन दो गोदामों में लगाई थी आग
आठ दिन पहले 2 जून की रात कांकेर जिले में नक्सलियों ने सिकसोड़ थानांतर्गत ग्राम सुरेवाही में तेंंदूपत्ता गोदाम में आग लगाई थी। सुरेवाही में चारगांव तेंदूपत्ता समति ने अस्थाई गोदाम बनाया था। आगजनी में तेंदूपत्ता से भरे 1222 बोरे जलने से 43 लाख का नुकसान हुआ था। इसी रात कोयलीबेड़ा तेंदूपत्ता गोदाम में भी नक्सलियों ने आग लगाई थी। कोयलीबेड़ा में कामतेड़ा समिति ने तेंदूपत्ता डंप किया था।
कांकेर के नक्सलियों का भी हाथ होना संभव
पड़ोसी जिला गढ़चिरौली के गट्टा जांबिया थाना प्रभारी सुधीर पाडुले ने बताया कि वन विभाग का दफ्तर में आग लगाने की घटना को 40 से अधिक गट्टा दलम के नक्सलियों ने अंजाम दिया है। वारदात में शामिल 25 से अधिक नाम सामने आ चुके हैं जिनका रिकार्ड खंगाला जा रहा है। हो सकता है इसमें कांकेर के भी नक्सली शामिल हों। नुकसान आंकलन नहीं किया जा सका है।
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