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केंद्र का आर्थिक पैकेज हमारी जरूरत पूरी करने में असफल, कर्ज की शर्तें हटाई जाएं

केंद्र सरकार से अतिरिक्त मदद नहीं मिलने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नया दबाव बनाते हुए कर्ज की लिमिट को दो प्रतिशत बढ़ाने के लिए लगाई गई शर्तों को हटाने की मांग की है। सीएम ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कहा है कि केंद्र का आर्थिक पैकेज राज्य के लिए उपयोगी नहीं है। इसलिए राज्यों को कर्ज लेने की छूट दी जाए। केंद्र ने राज्यों की कर्ज लिमिट में चार शर्तों के साथ दो प्रतिशत का इजाफा करने की अनुमति देने का प्रावधान किया है। ये चार शर्तें हैं-किसानों को बिजली सब्सिडी सीधे दी जाए। कारोबार की अनुमति आसानी से मिले। करों में सुधार और वन नेशन वन राशन कार्ड की अनिवार्यता। इन चार शर्तों पर ही भूपेश को वर्तमान दौर में आपत्ति है। उन्होंने लिखा है कि आर्थिक सुधारों के लिए ये शर्तें अच्छी हो सकती हैं लेकिन कोरोना के संकट के दौर में अभी ये व्यावहारिक नहीं हैं। उनके अनुसार संकट के इस दौर में संकट के समय में गरीब परिवारों को नि:शुल्क खाद्यान्न, वेतनभोगियों को नियमित वेतन और सभी के लिए समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करना राज्य की प्राथमिकता में है। इसलिए सरकार को इन पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। दूसरी ओर राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां और नक्सल क्षेत्र की दिक्क्तों के कारण आर्थिक सुधारों के कदम उठाने में दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए भूपेश ने मांग की है कि बिना शर्त के ही राज्य को दो प्रतिशत अधिक कर्ज लेने की छूट प्रदान की जाए।
12 हजार करोड़ है क्रेडिट लिमिट
हर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के मुताबिक केंद्र सरकार व आरबीआई क्रेडिट लिमिट तय करता है। इसके मुताबिक ही राज्य सरकार बैंकों से कर्ज ले सकती है। छत्तीसगढ़ की क्रेडिट लिमिट 12 हजार करोड़ है। आपदा के समय या विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार केंद्र से स्पेशल पैकेज मांगती है। यदि केंद्र पैकेज नहीं देता है तो राज्य क्रेडिट लिमिट से 2% अतिरिक्त कर्ज ले सकता है। इसके लिए चार प्रमुख शर्तें हैं। किसानों को जो बिजली की सब्सिडी दी जा रही है, उसे डीबीटी से देना होगा। यानी पहले किसान बिल दें और छूट की राशि उनके खाते में आ जाए या सरकार अलग फीडर बनाए, जिससे खपत की पता चल सके। इसी तरह वन नेशन वन राशन कार्ड के लिए सभी पीडीएस हितग्राहियों का आधार कार्ड व बैंक खाते जोड़ना होगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए राज्य सरकार स्तर पर जो अनुमति दी जाती है, उसे जिले स्तर पर करना होगा। नगरीय निकायों द्वारा जो टैक्स लिए जाते हैं, उसकी नियमित वसूली और जमीन की गाइडलाइन रेट के साथ-साथ प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाना होगा। इसके लिए जीआईएस सर्वे अनिवार्य है।



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Center's economic package failed to meet our needs, loan terms should be removed


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