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हमारे यहां से बुरे हालात थे अमेरिका के, लोग पार्टियां करते रहे और बढ़ गया कोरोना

संदीप राजवाड़े | न्यूजीलैंड कोरोना जिस तरह कोरोना से जीता, वह पूरी दुनिया के लिए उदाहरण है। दूसरी ओर, अमेरिका जैसा पूर्ण विकसित देख किस तरह कोरोना के कहर में फंस गया, वह भी प्रदेश और देश के लिए कम बड़ा सबक नहीं है। राजधानी के सीनियर कार्टूनिस्ट व ब्लॉगर संतोष कुमार बिसेन 5 जनवरी को अमेरिका गए और लाॅकडाउन वगैरह में ऐसे फंसे कि 9 जून को राजधानी लौटे। बिसेन को लगता है कि अमेरिका में लोगों और सरकारी एजेंसियों की जबर्दस्त लापरवाही की वजह से कोरोना इस बुरी तरह फैला। लाॅकडाउन और फिजिकल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन रायपुर-प्रदेश में जितना हुआ, उससे ज्यादा खराब हालात अमेरिका में थे। रायपुर में हालात ठीक हैं, लेकिन वहां के अनुभव से सबक लेना जरूरी है ताकि संक्रमण इसी तरह काबू में रहे।
रायपुर की एक होटल में पिछले 6 दिन से पेड क्वारेंटाइन काट रहे बिसेन ने अपने अनुभव भास्कर से मेल पर शेयर किए हैं। उन्हीं के शब्दों में - उन्होंने बताया कि कैसे अमेरिका में लॉकडाउन व अन्य नियम-कायदे न होने से हालात बिगड़े और शासन के साथ वहां की पॉलिसी भी जिम्मेदार है। लेकिन उन्होंने जहां वहां के लोग बर्गर, फ्रोजन फूड के साथ शराब पीकर रह रहे थे, उन्होंने अपने आपको योग और काढ़ा के जरिए कोरोना से बचाए रखा। उनकी जुबानी पूरी कहानी-
भास्कर के लिए संतोष बिसेन ने लिखा
मैं जनवरी से अब तक अमेरिका में रहा। तीन माह का कोरोना काल भी देखा। मेरे समेत अलग-अलग 18 देशों के लोगों का चयन ब्राइट फेलोशिप में हुआ। यहां से पूरा दल 5 जनवरी को अमेरिका की इंडियाना काउंटी पहुंचा। वहां से सबको अलग-अलग शहरों की यूनिवर्सिटी में जाना था। हमारी टीमें 7 से 12 मार्च के टूर पर न्यूयॉर्क और बोस्टन के लिए निकलीं। तब अमेरिका में संक्रमण शुरू हो रहा था। मैंने 8 से 10 मार्च तक न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क, टाइम्स स्क्वायर, ब्रोकलिन ब्रिज और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी जैसे कई पर्यटन स्थलों में लोगों को आम दिनों की तरह घूमते, पार्टी करते और पिकनिक मनाते देखा। यही वजह समय था, जब वहां सख्ती की बात शुरू हुई थी, लेकिन लापरवाही चरम पर थी। लाॅकडाउन भी लगा तो 8 दिन का। हम देश की खबरों में लाॅकडाउन के उल्लंघन की सूचनाएं देख रहे थे, लेकिन अमेरिका में तो इससे भी बुरा हुआ। वहां लाॅकडाउन सख्त भी नहीं था और लोगों ने जमकर लापरवाही की। इसी समय कोरोना वहां तेजी से फैला और अब अमेरिका दुनिया में संक्रमण के लिहाज से पहले नंबर पर चल रहा है।
अमेरिकियों की लापरवाही से सबक लिया तुरंत विवि लौटे और खुद हुए क्वारेंटाइन
बिसेन के अनुसार- हमें लगा कि भारी लापरवारी हो रही है, खतरा बढ़ सकता है, तब यात्रा रोकी और फ्लाइट से यूनिवर्सिटी पहुंच गए। डेढ़ माह तक अपने सिंगल रूम में ही लगभग क्वारेंटाइन की तरह रहा। सब कुछ ऑनलाइन करते रहे। इसी दौरान उनके साथ गए दूसरे देश के लोग फ्रोजन फूड और शराब से कमजोर होने लगे तो हमने खानपान बदल लिया। हर दिन काढ़ा लेने लगा, जो वहां मिल जाता था। सुबह-शाम योग करने लगा, समय भी बढ़ा दिया।
इसी तरह दो माह गुजारने के बाद पता चला कि 7 जून को निकलना है। वहां से निकले और 3 फ्लाइट बदलकर 9 जून को रायपुर आ गए। यहां आकर मैं 6 दिन से होटल में पेड क्वारेंटाइन हूं, सेहत भी अच्छी है। यहां का अनुभव इतना ही है कि फ्लाइट के अंदर सब भगवान भरोसे है। यहां घरेलू उड़ानों में वैसी सोशल डिस्टेंसिंग व नियम-कायदे नहीं देखे, जैसे बाकी अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स में थे।



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America had bad conditions from us, people kept doing parties and Corona increased


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