अनलॉक-1 में लगातार मिल रही छूट से मॉल व सिनेमाघर के साथ जंगल सफारी और नंदनवन का लाॅकडाउन खत्म होने के आसार हैं। 8 जून के बाद जंगल सफारी और नंदनवन में पर्यटकों की एंट्री पर फैसला हो सकता है। सेंट्रल जू अथॉरिटी ने गाइड लाइन जारी की है। पर्यटकों को प्रवेश देने के साथ उस गाइड लाइन का पालन करना होगा। न्यूयार्क के जू में वन्य प्राणियों में कोरोना संक्रमण फैल जाने के बाद से सेंट्रल जू अथॉरिटी सफारी और नंदनवन जैसे वन्य प्राणियों के पर्यटन स्थल को लेकर बेहद सख्त हो गया है। उसी के बाद गाइड लाइन जारी की गई। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद ही पर्यटकों को सख्त पाबंदियों के साथ ही एंट्रीदी जाएगी।
वन विभाग के अफसरों के अनुसार न्यूयार्क के जू में पर्यटकों से ही वन्य प्राणियों में संक्रमण फैला था। वन्य प्राणी विशेषज्ञों के अनुसार जू में किसी एक जंगली जानवर के संक्रमित होने से यह तेजी से बाकी में फैल सकता है। इस वजह से सावधानी जरूरी है। इस बीच कोरोना संक्रमण फैलने के बाद सेंट्रल जू अथॉरिटी से अलर्ट जारी होते ही जंगल सफारी और नंदनवन में वन्य प्राणियों की देखभाल में बेहद सावधानी बरती जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों से लेकर एक-एक स्टाफ थर्मल स्क्रीनिंग के बिना एंट्री नहीं कर पा रहे हैं। सफारी और नंदनवन के गेट पर केमिकल टनल बनाया गया है।
वहां से गुजरकर पहले चप्पल जूते बैक्टीरिया मुक्त करवाए जा रहे हैं। उसके बाद सैनिटाइजर टनल से गुजरने के बाद ही सफारी और नंदनवन में प्रवेश दिया जा रहा है। वन्य प्राणियों को भोजन देने में भी बेहद सावधानी बरती जा रही है। भोजन देने वन कर्मियों को पीपीई किट पहनकर ही वन्य प्राणियों के बाड़े में एंट्री जा रही है। भोजन देने वाले बर्तनों को भी पूरी तरह से सैनिटाइज करने के बाद ही उपयोग किया जा रहा है।
चिंकारा की होगी सफारी के जू में एंट्री
जंगल सफारी में चिंकारा लाया जाएगा। उसे रखने के लिए जंगल सफारी से सटे जू में बाड़ा बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। वन विभाग के अफसरों के अनुसार चिंकारा अभी केवल बिलासपुर के कानन पेंडारी में है। वहीं से कुछ जोड़े सफारी के जू में लाकर रखे जाएंगे।
सफारी और जू में इन वन्य प्राणियों के बाड़े
जू में सफेट बाघ, सिंह, तेंदुआ, भालू, मगरमच्छ, घड़ियाल, दरियाई घोड़ा, कछुआ, मॉनीटर लिजार्ड अभी बाड़े में हैं। सफारी में सिंह, बाघ, भालू और हिरण, चीतल व नील गाय के बाड़े हैं। हर घास खाने वाले वन्य प्राणियों के भोजन के लिए किसी तरह की दिक्कत नहीं है, लेकिन मांसाहारी वन्य प्राणियों के भोजन के लिए ही खासे जतन करने पड़ रहे हैं।
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