बारिश शुरू होते ही इंद्रावती नदी पार के गांवों के करीब 8000 से ज्यादा ग्रामीणों के जिंदगी की बड़ी जंग शुरू हो गई है। इस बार जून महीने में ही नदी का जलस्तर बढ़ गया है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर डोंगी से नदी पार कर रहे हैं। बाढ़ आने पर आगे स्थिति और भयावह होगी।
बारिश में डोंगी डूबने और पलटने से इन घाटों में हर साल मौतें होती हैं। पाहुरनार व बड़ेकरका घाट में पुल का निर्माण हो रहा है। काम पूरा होने में दो साल का वक्त लगेगा। यानी नदी पार करने यहां के लोगों को जंग अभी ऐसे ही लड़ना है।बारिश के पहले प्रमुख घाटों पर प्रशासनिक प्रबंध कैसे हैं, इसे देखने भास्कर टीम दंतेवाड़ा जिले की 4 प्रमुख इंद्रावती नदी घाटों में पहुंची। मुचनार को छोड़ दें तो एक भी घाट में मोटर बोट नहीं है। सभी घाटों पर ग्रामीणों के लिए लाइफ जैकेट तक की व्यवस्था नहीं है।
मुचनार- कोड़नार: मोटर बोट खराब
नदी पार गांव कोड़नार, मंगनार, कौशलनार, तुमरीगुंडा, हांदावाड़ा गांव जाने का प्रमुख घाट है। इस घाट पर सालभर इंद्रावती नदी में पानी रहता है। इन गांवों के करीब 5000 से ज्यादा ग्रामीणों को नदी पार करने डोंगी का सहारा लेना ही पड़ता है। यहां 3 साल पहले प्रशासन ने मोटरबोट तो उपलब्ध कराई। मोटरबोट को ग्रामीणों ने नदी के बीच चट्टानों के पीछे छिपाकर सिर्फ इसलिए रखा कि गर्मी में इसे लोग तोड़ न दें। ग्रामीण लक्ष्मण ने बताया बोट खराब हो गई है। लाइफ जैकेट नहीं हैं।
पाहुरनार-छिंदनार: यहां तो मोटर बोट ही नहीं

इस घाट से पाहुरनार, पदमेटा, कौरगांव, चेरपाल के करीब 2000 से ज़्यादा ग्रामीण आना-जाना करते हैं। दिसंबर के बाद जलस्तर काफी कम हो जाता है। यहां सिर्फ 6 महीने ही डोंगी का इस्तेमाल होता है। ग्रामीणों के ठहरने के लिए प्रतीक्षालय बना है। लेकिन बिजली नहीं है। ग्रामीणों ने बताया जलस्तर बढ़ा तो अब डोंगी से ही नदी पार कर रहे हैं। न तो मोटरबोट है और न लाइफ जैकेट की व्यवस्था।
ये व्यवस्था ज़रूरी ताकि ग्रामीणों को कुछ हद तक दी जा सके राहत
- जहां पत्थर-चट्टानें ज़्यादा हैं, घाटों में चेतावनी बोर्ड हो।
- बाढ़ आने की स्थिति में यहां ग्रामीणों के लिए ठहरने के लिए प्रतीक्षालय के लिए एक कमरा तो जरूर है लेकिन बिजली व्यवस्था हो।
- बाढ़ आने की स्थिति में नदी पार नहीं करने संबंधी सूचना बोर्ड भी लगाना जरूरी।
- इमरजेंसी सेवाओं के नंबर भी यहां लिखे जाने जरूरी, ताकि ग्रामीणों को समय पर मदद मिल सके।
- जहां मोटरबोट है उसकी मरम्मत जरूरी और लाइफ जैकेट के भी पर्याप्त इंतजाम हों।
कौरगांव- बड़ेकरका: यहां डोंगी से आना-जाना
इन दोनों घाटों में भी अब डोंगी से ग्रामीणों का सफर फिर शुरू हो गया है। इन घाटों में अक्सर डोंगी पलटने से मौतें होती हैं। गर्भवती महिला सहित कई ग्रामीण यहां जान गंवा चुके हैं।
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