कोरोना संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार के साथ प्रदेश सरकार भी फिजूलखर्ची रोकने की बात कह रही है। प्रदेश में कर्मचारियों की डीए में बढ़ोतरी रोकने की तैयारी है। यहां तक कर्मचारियों की तनख्वाह कटौती का डर है लेकिन नगर निगम में आयुक्त और उपायुक्त के चेंबर की साज-सज्जा पर आठ लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। उपायुक्त इतने उत्साहित हैं कि पीडब्ल्यूडी से उन्होंने इस काम की फाइल मंगा ली है। सजावट में कमी ना रहे इसलिए विभाग के इंजीनियर के बदले प्राइवेट इंटीरियर डिजाइनर को काम दिया गया है।
शहर के सरोकार के लिए चुने गए महापौर और सभापति भी इसे लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। परिस्थितियां प्रतिकूल हैं और निगम में आवक भी कम हुई है ऐसे में इस तरह के काम से निचले स्तर के कर्मचारी भी हैरत में हैं। पूर्व आयुक्त राजेंद्र गुप्ता ने अप्रैल में पहले महापौर मद से चेंबर रिनोवेशन के लिए नौ लाख रुपए इस्टीमेट तैयार कराया था। इसके बाद इसके लिए ओपन टेंडर कॉल किया गया था। टेंडर की दर से साढ़े 12 प्रतिशत बिलो रेट पर रितेश कुमार अग्रवाल को यह काम दिया गया है। गुरुवार को ठेकेदार ने बिना वर्क ऑर्डर के ही सिविल वर्क भी शुरू करा दिया है।
किस मद से काम करा रहे इस पर भी कंफ्यूजन
यह काम किस मद की राशि से हो रहा है, इस पर भी अफसरों को कंफ्यूजन है, नगर निगम के पूर्व आयुक्त यह काम मेयर मद से होने की बात कह रहे हैं। तो ईई अजीत तिग्गा इसे निगम परिषद की राशि बता रहे हैं। निगम के जनप्रतिनिधियों के अनुसार मेयर मद की राशि सिर्फ जनहित के कार्यों में खर्च की जाती है। वहीं निगम परिषद की राशि आपात स्थिति में शासन से पैसे नहीं मिलने पर की जाती है।
पुराने काम रोकने के निर्देश नहीं, यह कराना जरूरी था
"यह काम पहले से स्वीकृत है, इन्हें रोकने या नहीं करने से संबंधित शासन ने कोई निर्देश नहीं दिए हैं। हां जो नए कार्य हैं, उनका प्रपोजल न भेजना है, न बनाना है। जो बेसिक जरूरतें हैं, उन्हें तो पूरा करना पड़ेगा। शासकीय कार्यालयों को उनके गरिमा के अनुरूप बैठने योग्य बनाया जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, यदि शासन से कोई निर्देश मिलेगा तो जरूर रुकवा देंगे।''
-आशुतोष पांडेय, आयुक्त, नगर निगम
करीब 8 लाख का काम है
"करीब 8 लाख रुपए का काम है, इसकी पूरी फाइल उपायुक्त साहब के पास है। चेंबर में सभी फॉल्स सिलिंग, वॉल प्लास्टिक शीट व सारे डेकोरेटिव वर्क हैं। कुछ पुरानी खिड़की दरवाजे भी बदलने हैं, रिटायरिंग रूम दुरूस्त करना है।''
-अजीत तिग्गा, ईई नगर निगम
अभी इस्टीमेट नहीं मिला है
"अभी हम लोगों को इस्टीमेट नहीं मिला है, निगम के उपायुक्त बाहर के किसी प्राइवेट इंजीनियर से इंटीरियर डिजाइन करा रहे हैं। इसलिए हमने सिर्फ सिविल वर्क शुरू किया है। वर्क ऑर्डर अभी नहीं मिला है, रितेश अग्रवाल और मैं दोनों मिलकर यह काम कर रहे हैं।''
-संजय अग्रवाल, ठेकेदार निगम
मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है, समझूंगी मामले को
"मुझे इस निर्माण कार्य की पूरी जानकारी नहीं है, मैं अभी बाहर हूं, पहले मैं इस मामले को समझ लूं इसके बाद आगे क्या करना है उसपर निर्णय लेंगे।''
-जानकी काटजू, महापौर रायगढ़
कोरोना काल में यह कामकरना उचित नहीं
"चेंबर में काम की जरूरत थी, इसलिए मेयर मद की राशि से मैंने टेंडर किया था, लेकिन संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से मैंने इसे कराना उचित नहीं समझा।''
-राजेंद्र गुप्ता, पूर्व आयुक्त नगर निगम
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