82 दिन बाद सोमवार को मंदिर और पार्क को खोलने की अनुमति मिली। रविवार की देर शाम कलेक्टर दीपक सोनी ने आदेश जारी किया। प्रशासन ने नियम तय कर सोमवार को दंतेश्वरी मंदिर के पट खोले। कोरोनाकाल में नई व्यवस्था के तहत जैसे ही मंदिरों के पट खुले वैसे ही श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए। मंदिर समिति के अनुसार पहले दिन सुबह से शाम 5 बजे तक 300 से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। सैनिटाइजर, थर्मल स्कैनर, सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराया गया। लेकिन और भी नियमों को तय करने शाम को टेंपल स्टेट कमेटी की बैठक हुई।
मंदिर परिसर में डोम के नीचे स्वास्थ्यकर्मियों की टीम बैठी रही। यहां थर्मल स्कैनिंग के ज़रिए श्रद्धालुओं के बॉडी टेम्परेचर की जांच हुई। हैंडवॉश किया तब मंदिर के अंदर मुख्य द्वार से प्रवेश की इजाजत मिली। मंदिर की घंटियां नहीं बजाई और गर्भगृह से दूर करीब 25 फीट दूर रहकर नई व्यवस्था के तहत बाहर से ही माताजी के दर्शन भक्तों ने किए। सभी के बीच भी करीब 1 मीटर का फासला था। पहली बार ऐसा रहा कि न तो श्रद्धालु अपने साथ प्रसाद लेकर पहुंचे और न ही यहां से प्रसाद लेकर लौटे। सिर्फ मत्था टेक, दर्शन कर वापस लौट गए। मंदिर के पुजारी विजेंद्र ठाकुर ने बताया कि कोरोना काल तक ऐसी ही व्यवस्था रहेगी।
फिर से जिंदगी आई पटरी पर
मंदिरों के पट सोमवार से खुलने थे, ऐसे में यहां दुकानदारों ने भी व्यवस्था कर ली थी। मंदिर के बाहर पूजन सामग्री की दुकानें भी सोमवार से खोली गई। दंतेवाड़ा में सभी दुकानों को अनुमति थी, लेकिन मंदिर नहीं खुलने पर दुकानदार घर बैठे हुए थे। लेकिन प्रसाद की अनुमति नहीं थी ऐसे में बिक्री नहीं हुई। मंदिर खुलने की खबर पर ग्रामीण फूल लेकर भी पहुंचा, ताकि इसे बेच चंद पैसे कमा लें।
पार्क बंद रहे, लोगों ने जताई नाराज़गी
पार्क खोलने की भी अनुमति मिल गई। लेकिन सोमवार को दंतेवाड़ा के पार्क में ताला जड़ा रहा। ऐसे में पार्क आने वाले बच्चे, परिजन वापस लौट गए व नाराजगी भी देखने को मिली।
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