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दो दलों में बंटे हाथी, चंदा के साथ पहुंचे 7 साथी, बागडोंगरी में केले की बाड़ी बर्बाद

पिछले पांच दिनों से कांकेर जिले की सीमा से 5 किमी दूर धमतरी जिले के गंगरेल डैम के डूबान क्षेत्र में मौजूद 21 हाथी अब दो दलों में बंट गए हैं। दल का नेतृत्व कर रही चंदा समेत कुल 8 हाथियों का दल से अलग होकर 12 जून की रात कांकेर जिले के नरहरपुर विकासखंड में प्रवेश कर गया। यहां रात में उत्पात मचाते हुएफसल तथा मकानों को नुकसान पहुंचाया। रात में ही वनविभाग के सक्रिय होने के बाद हाथी सुबह धमतरी जिले की पहाड़ी पहरियाकोना वापस चढ़ गए।
गंगरेल बांध के डूबान की पहाड़ी पहरियाकोना कांकेर जिले के नरहरपुर विकासखंड के गांव बागडोंगरी से महज तीन किमी दूरी पर है। महासमुंद जिले से 4 मई को चंदा समेत 21 हाथी रवाना हुए थे जो पिछले डेढ़ माह में बागबहरा, गरियाबंद तथा धमतरी होते कांकेर की ओर आगे बढ़ रहे हैं। 7 जून को हाथियों का दल कांकेर जिला से मात्र 7 किमी दूर धमतरी के कलारबहरा गांव तथा गंगरेल बांध के डूबान क्षेत्र में पहुंच गया था। पिछले पांच दिनों तक दल यहीं रहा।
12 जून को चंदा व उसके 7 साथी अलग होकर शाम को कांकेर की ओर बढऩे लगे। दल से अलग हुए हाथी रात 10 बजे कांकेर जिले के गांव बागडोंगरी पहुंचे। किसान किसुल यादव की बाड़ी में पहुंच हाथियों ने केले की फसल खाई। केले के पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाया।इसके अलावा अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। बस्ती में ही हाथियों ने एक दीवार को भी गिराने कोशिश की। इससे दीवार की कुछ ईंट गिर गईं। उनके बस्ती में पहुंचने पर ग्रामीण हल्ला करने लगे। वहीं हाथियों की सुरक्षा में पहले से तैनात वनविभाग का अमला सक्रिय हो गया। हाथियों के बस्ती में आने पर सुरक्षा के मद्देनजर मशाल आदि जलाने लगे। इससे वे वापस बागडोंगरी से लगी नदी की ओर चले गए। सुबह तक वे वापस पहरियाकोना पहाड़ी पर चढ़ गए। उनकी सुरक्षा के मद्देनजर वनविभाग की टीम बागडोंगरी व उसके आसपास जंगल में तैनात है।
हाथियों पर विभाग की नजर : वन पाल कमलेश दुबे ने बताया कि हाथी कांकेर के बागडोंगरी गांव में पहुंचे थे लेकिन वे वहां से वापस धमतरी के पहरियाकोना पहाड़ी में चढ़ गए। अब वे वहां से कहां जाएंगे यह बताया नहीं जा सकता। विभाग हाथियों की सुरक्षा के लिए उन पर नजर बनाए हुए है।

अफसर बोले- किसानों को मिलेगा मुआवजा
हाथियों का झुंड गांव बागडोंगरी में घुसने व नुकसान करने की सूचना मिलते ही वनविभाग के अधिकारी भी वहां पहुंचे। घटनास्थल जाकर जायजा लिया। साथ ही पहाड़ी में हाथियों की उपस्थिति की भी जानकारी ली। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसानों के नुकसान का आंकलन कर उसका प्रकरण बना उसे क्षतिपूर्ति दी जाएगी।

लोगों के जंगल जाने परलगाया गया प्रतिबंध
हाथी 13 जून की स्थिति में जिले की पहाड़ी में हैं। वहां से जिले के गांव बागडोंगरी, मुरूमतरा, मारवाड़ी, करिहया पहर आदि काफी नजदीक हैं। इन गांव में हाथियों की दहशत बनी हुई है। दूसरी ओर वनविभाग ने इन सभी गांव के लोगों को जंगल जाने तथा रात में निकलने मना कर दिया है। ग्रामीणों को सचेत रहने कहा गया है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया तो अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी।
पोस्टर लगाकर लोगों को कर रहे जागरूक
वन विभाग आसपास के गांव समेत नरहरपुर नगर पंचायत तक में हाथियों के आने की सूचना देने तथा सुरक्षा के लिए मुनादी करा रहा है। 12 जून को हुए ग्रामसभा में भी वन विभाग का अमला पहुंच सभी ग्रामीणों को इसकी सूचना देते हुए सुरक्षा के लिए अपने घर में रहने कहा है। हाथियों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए भी इलाके में पोस्टर लगाने का काम 14 जून से वन विभाग करेगा।



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Elephants divided into two teams, 7 companions arrived with Chanda, banana fence destroyed in Bagdongri


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