जिले में 79 गांव बाढ़ प्रभावित, खतरा हुआ तो सुरक्षा के लिए सिर्फ दो बोट, 2 इमरजेंसी लाइट और 20 गोताखोर
जिले में कुल 79 गांव ऐसे हैं, जो नदियों के तट पर बसे हैं। इसमें से सर्वाधिक 30 गांव महासमुंद ब्लॉक में हैं और अधिकांश महानदी के तट पर बसे हैं। प्रशासन भी इन गांवाें को संभावित बाढ़ प्रभावित मानता है। यदि इन गांवों में बाढ़ संबंधी कोई खतरा होता है तो जिले की आपदा एवं राहत बचाव टीम पूरी तरह से मुस्तैद है, लेकिन केवल 2 बोट, 2 इमरजेंसी लाइट और 20 गोताखोर के साथ। टीम का मानना है कि संसाधन इतने ही हैं और वे किसी भी स्थिति से निपटने पूरी तरह तैयार हैं।
हालांकि पांच या इससे अधिक गांव में बाढ़ की स्थिति निर्मित होने पर टीम ने रायपुर से मदद मांगने की बात भी कही।
जिले में तीन दिन पहले हुई तेज बारिश के चलते कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई थी। पिथौरा, बागबाहरा, बसना और सरायपाली क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात सामने आए थे। पिथौरा, बागबाहरा और सरायपाली क्षेत्र में नालों में अधिक पानी होने के कारण कई गांव के रास्ते बंद हो गए थे। इस साल शुरुआती दिनों में हुई अच्छी बारिश के चलते नदियों के किनारे बसे गांव के लोगों में चिंता है। हालांकि पिछले कई वर्षों से इन क्षेत्राें में बाढ़ के हालात नहीं बने हैं, लेकिन मौसम को देखते हुए ग्रामीणों में चिंता है। बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन टीम का कहना है कि वे किसी भी परिस्थिति से निपटने को तैयार हैं और उन्होंने इसकी पूरी तैयारी भी कर ली है, लेकिन हालात कुछ और हैं।
बुधवार को भास्कर टीम ने महानदी के किनारे बसे गांव का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि फिलहाल अब तक कोई भी टीम मौके का जायजा लेने नहीं आई है। यदि
बाढ़ की स्थिति निर्मित होती है तो किससे संपर्क करना है और हमें क्या करना है, इसकी जानकारी भी अब तक किसी ने नहीं दी है।
प्रशासन का दावा- टीम तैयार, सारी व्यवस्थाएं कर ली गईं
इधर, इस मामले में राहत बचाव कार्य प्रभारी डिप्टी कलेक्टर पूजा बंसल का कहना है कि राहत कार्य के लिए सारी व्यवस्थाएं हो चुकी हैं। प्रत्येक गांव में एक -एक सरकारी स्कूल को सुरक्षित रखा गया है। बाढ़ आने पर इन्हीं स्कूलों में ग्रामीणों को ठहराया जाएगा। खाने-पीने की पूरी व्यवस्था होगी। वहीं होमगार्ड के जिला सेनानी की टीम भी 24 घंटे मुस्तैद है। एक रबर बोट व एक एल्युमिनियम बोट है, जिसकी सहायता से बाढ़ प्रभावितों को निकाला जा सकता है। बारिश होने पर एक-एक घंटों में बाढ़ आपदा प्रबंधन ब्लॉकों से जानकारी लेती है।
बाढ़ का खतरा कैसे, इन दो गांव के ग्रामीणों से जानिए
बड़गांव : बाढ़ से निपटने कोई तैयारी ही नहीं, स्थिति बनने पर आती है बचाव टीम
महासमुंद विकासखंड का गांव बड़गांव महानदी के तट पर बसा है। वैसे तो जगह-जगह बने एनीकट और मॉनिटरिंग सिस्टम के कारण महानदी में अब बाढ़ का खतरा कम ही रहता है, लेकिन अचानक नदी में पानी बढ़ा तो इससे निपटने के लिए यहां कोई तैयारी नहीं है। ग्रामीण रोहित निषाद, आसकरण ने बताया कि फिलहाल आपदा प्रबंधन के कर्मचारी गांव में तैनात नहीं है। जब गांव में बाढ़ की स्थिति निर्मित होती है तब ही बचाव टीम आती है।
चिंगरौद : दो साल पहले महानदी का पानी बढ़ने से फंसे थे ग्रामीण, सूचना पर निकाला
महासमुंद ब्लॉक का ग्राम चिंगरौद सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित गांव में से एक है। गांव के कार्तिक राम यादव दो साल पहले की घटना का जिक्र करते हुए बताते हैं कि साल 2018 में गरियाबंद क्षेत्र में तेज बारिश हुई थी। इसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं थी, इसलिए वे खेतों में काम कर रहे थे। शाम को अचानक महानदी का पानी बढ़ गया तो ग्रामीण खेत में ही फंस गए थे। बाढ़ की सूचना प्रशासन को दी गई, जिसके बाद वहां से फंसे लोगों को टीम ने निकाला था।
जानिए, कौन से ब्लॉक में कितने गांव डूबान क्षेत्र में
महासमुंद 30
बागबाहरा 14
पिथौरा 11
बसना 10
सरायपाली 14
जानिए... बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन की ये है तैयारी
प्रशासन के पास एक रबर बोट 25 एचपी का, एक एल्युमिनियम बोट 40 एचपी का , 20 लाइफ जैकेट, 20 गोताखोर, 8 रस्सा, 2 इमरजेंसी लाइट , 2 चैन शॉ (झाड़ काटने की मशीन) है।
सीधी बात :अनुज कुमार एक्का, जिला सेनानी होमगार्ड,बाढ़ आने से पहले ही कर लेंगे व्यवस्था
जिले में बाढ़ की स्थिति आने पर बचाव कार्य के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
- बाढ़ से बचाव के लिए हमारे पास 2 बोट है, लाइट जैकेट, लाइफ ब्वॉय, रस्सा, इमरजेंसी लाइट व चैन शॉ है, जिससे बचाव कार्य किया जाता है।
यदि जिले के तीन ब्लॉकों के पांच से छह गांव में एक साथ बाढ़ आ जाए तो क्या करेंगे, टीम इतने कम संसाधनों में कैसे बचाव करेगी?
- यदि ऐसी स्थिति निर्मित होती है तो रायपुर संभाग से मदद ली जाती है। रायपुर में पर्याप्त मात्रा में बोट है।
रायपुर से आने में समय लग सकता है, ऐसी इमरजेंसी में क्या करेंगे?
बाढ़ की जानकारी हर घंटे ली जाती है। ऐसे में पहले ही स्थित के बारे में पता चल जाएगा और पहले से ही व्यवस्था कर ली जाएगी।
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