नगर में जगन्नाथ महाप्रभु की रथ यात्रा निकालने की परंपरा नहीं टूटेगी। जिला प्रशासन ने बुधवार को बस्तर गोंचा के तहत रथ यात्रा निकालने की अनुमति 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज को दी। इसके लिए समाज के लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की हिदायत देने के साथ इस पर्व के दौरान 10 साल से कम और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को मंदिर में प्रवेश करने पर रोक रहेगी। जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के दर्शन व पूजन करने के लिए जाने वाले लोगों को मास्क लगाना जरूरी होगा। इसके साथ ही एक दूसरे से 6 फीट की दूरी बनाकर रखनी होगी।
वहीं श्रद्धालुओं को अपने जूते-चप्पल जूता स्टेंड में या फिर अपने गाड़ी में या मंदिर से 50-100 फीट की दूरी पर रखना होगा। मंदिर में प्रवेश के पहले साबुन, पानी, सैनिटाइजर से हाथ धोना पड़ेगा। 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष हेमंत पांडे ने बताया कि रथ यात्रा को लेकर कलेक्टर रजत बंसल ने अनुमति दी है । इसके बाद बिना किसी परेशानी के इस महापर्व की तैयारी की जाएगी। इस पर्व की हर रस्म को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सम्पन्न किया जाएगा। किसी भी श्रद्धालु को सर्दी, खांसी होने या छींकने पर उसे तत्काल मंदिर परिसर से बाहर किया जाएगा।
18 फीट ऊंचे रथ पर सवार होकर निकलेंगे महाप्रभु
भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा के लिए नए रथ का निर्माण शुरू हो गया है। 23 जून को निकलने वाले इस रथ यात्रा के लिए रथ का निर्माण सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार बेड़ा उमरगांव के ग्रामीणों के द्वारा किया जा रहा है। सिरहासार भवन में चल रहे रथ निर्माण में कारीगर अभी रथ के पहिए के साथ ढांचा तैयार कर रहे हैं। रथ का निर्माण कर रहे हरदेव, चैन सिंह विश्वकर्मा, रघु, बुआनी और लच्छन ने कहा कि रथ निर्माण के लिए काफी कम समय मिला बावजूद इसके 21 जून तक रथ का निर्माण कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस साल करीब 18 फीट ऊंचा रथ बनाया जाएगा। इधर दूसरी ओर 360 घर आरण्यक ब्राहम्ण समाज के लोगों ने बताया कि जिला प्रशासन ने रथ यात्रा की अनुमति दे दी है ।
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