लॉक डाउन के दौरान दुकानें बंद होने से पीते की खेती के लिए मल्चिंग सीट नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में रायपुर जिले के मोहदा गांव के किसान ने धान के पैरे का उपयोग किया। इससे पपीते की फसल भी खूब लहलहा गई और प्रति एकड़ 6 हजार रुपए की बचत भी हो गई।
किसान भरत पटेल ने बताया कि इस नवाचार का आइडिया लॉकडाउन के कारण आया। यदि मल्चिंग सीट मिल जाती तो शायद ये आइडिया नहीं आता। उन्होंने बताया कि धान का पैरा मल्चिंग सीट की तुलना में सस्ता भी है और यह गर्मी के दिनों में खेतों की नमी को मेंटेन भी रखता है। मल्चिंग सीट लगाने में प्रति एकड़ 8 हजार रुपए का खर्च आता है जबकि पैरे में महज दो हजार रुपए ही खर्च होता है। भरत ने 6 एकड़ पपीते की खेती की है जिसमें उन्होंने 36 हजार रुपए की बचत की है।
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