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शहर में रक्तदान करने वाले 5 हजार से ज्यादा लोग सक्रिय

शहर में स्वैच्छिक रूप से रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं की संख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है। इनमें अधिकांश युवा हैं, जो कहीं से भी सूचना मिलने पर रक्तदान करने तत्काल पहुंच जाते हैं। ऐसे रक्तदाताओं की संख्या शहर में तकरीबन 4 से 5 हजार बताई जाती है। इनमें महिलाएं भी पीछे नहीं हैं।
अलग-अलग लोगों द्वारा चलाए जा रहे समूहों के जरिए जरूरतमंदों को खून मुहैया कराने को लेकर ये लोग नि:स्वार्थ मदद कर रहे हैं। इधर लॉकडाउन के दौरान ब्लड बैंकों में रक्त की कमी को दूर करने लोगों के समूहों ने लगातार रक्तदान भी किया है। बताया जाता है कि लॉकडाउन के दौरान महारानी अस्पताल के ब्लड बैंक में करीब 50 से ज्यादा लोगों ने रक्तदान किया है। वहीं पुलिस के जवान भी इसमें शामिल हैं। हालांकि शहर में तकरीबन 10 हजार से ज्यादा रक्तदाता बताए जाते हैं, लेकिन इनमें से 50% रक्तदाता ही नियमित रूप से सक्रिय होकर रक्तदान करते हैं।
निजी बैंक से खून की व्यवस्था करने चुकाने पड़ते हैं पैसे: शहर में दो सरकारी और एक निजी ब्लड बैंक संचालित है। सरकारी ब्लड बैंकों में एक महारानी अस्पताल तो दूसरा डिमरापाल स्थित मेडिकल कॉलेज का है। इन दोनों ही ब्लड बैंकों से जरूरतमंदों को मुफ्त खून मिल जाता है, जबकि निजी ब्लड बैंक से लोगों को खून की व्यवस्था करने के लिए रूपए चुकाने पड़ते हैं। इन हालातों में हालांकि रक्तदाता तीनों ही ब्लड बैंकों में पहुंचकर सेवाएं देते हैं, लेकिन सरकारी संस्थाओं में रक्तदान करने को लोग प्राथमिकता देते हैं।
उद्देश्य यही कि जरूरतमंदों तक पहुंचे मदद
शहर में एक दूसरा समूह चला रहे मनीष मूलचंदानी का कहना है कि उनके पास करीब डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों की सूची है, जिनमें वे लगातार किसने किस तारीख को रक्तदान किया, उसकी जानकारी भी दर्ज है। मनीष ने बताया कि किसी भी हालत में लोगों की जरूरत को पूरा किया जा सके, इसके लिए वे बीते करीब 6 से 7 सालों से समूह चला रहे हैं। समूह में अधिकांश ऐसे लोग हैं, जो महज सूचना मिलने भर से ही रक्तदान करने पहुंच जाते हैं।

कई युवा स्वैच्छिक रक्तदान कर रहे
इसके अलावा कई युवा ऐसे भी हैं, जो समय देखकर खुद ही स्वैच्छिक रूप से ही रक्तदान करने पहुंच जाते हैं। ऐसे ही एक रक्तदाता कशिश ने बताया कि लॉकडाउन में लोगों को खून के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए उन्होंने रक्तदान किया है। दूसरी ओर जिले में धारा 144 लागू होने से कोई भी कार्यक्रम आयोजित करने कोई भी तैयारी नहीं की जा सकी है।

रक्तदान समूह के 300 लोग रहते हैं तैयार
शहर में रक्तदान समूह चलाने वालीं धारिणी तिवारी बताती हैं कि उनके साथ करीब 1 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं, जिसमें ढाई सौ से ज्यादा महिलाएं भी शामिल हैं। इन 1 हजार लोगों में करीब 300 रक्तदाता हर समय तैयार रहते हैं। इन हालातों में जिन्हें भी खून की जरूरत होती है, इन लोगों को बुलवा लिया जाता है और रक्त की व्यवस्था करवा ली जाती है। उन्होंने बताया कि कोशिश ये भी रहती है कि जरूरतमंदों को नि:शुल्क ही खून मिल जाए।



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More than 5 thousand people donating blood are active in the city


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