पखांजूर तहसील में नदी किनारे बसे 18 पंचायतों के 58 गांव ऐसे हैं, जो बरसात में बाढ़ की चपेट में आते हैं। इस गांवों में बाढ़ से बचाव के लिए अब तक पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। यदि इन गांवों में बाढ़ की स्थिति बनती है तो सुरक्षा के लिए स्थानीय आपदा एवं राहत बचाव टीम मुस्तैद है, लेकिन आपातकाल के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है। बोट से लेकर गोताखोर तक 150 किमी दूर जिला मुख्यालय कांकेर से मंगवानी पड़ती है। पिछले कई सालों में ऐसी स्थिति निर्मित हुई है। संसाधन के अभाव में बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने दो से तीन दिन तक मशक्कत करनी पड़ती है। इलाके की मेंढकी नदी, कोटरी नदी, कुरेनार नदी, बांदे नदी, कोयलीबेड़ा नदी समेत आकमेटा व जामकुटनी नाले में बाढ़ आने पर 58 गांवों की 17 हजार की आबादी प्रभावित होती है। चार दिन पहले हुई बारिश से कोयलीबेड़ा, बांदे क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। आकमेटा नाला, मेंढकी नदी, कोटरी नदी किनारे बसे गांवों के रास्ते बंद हो गए थे।
पखांजूर क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित होती हैं ये पंचायतें
पखांजूर तहसील अंतर्गत कोयलीबेड़ा क्षेत्र में बाढ़ आने पर अलपरस, पानीडोबीर, केसेकौडी, गुडाबेड़ा, तुरसानी और कमातेडा इन 6 पंचायतों के 20 गांव में बसे 6 हजार की आबादी का संपर्क प्रदेश व जिला मुख्यालय से कट जाता है। वहीं शंकरनगर, ओरछा, इरपानार, विकास पल्ली, कुरेनार, कंदाडी, सितरम, आकमेटा, रेंगावाही, ताड़वायली, बुरका, माच पल्ली क्षेत्र के 38 गांवों में बाढ़ आती है तो 11 हजार की आबादी प्रभावित होती है। एसडीएम पखांजूर निशा नेताम ने बताया बरसात की शुरुआत होते ही प्रशासन नदी किनारे बसने वाले गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क करता है। चेतावनी दी जाती है कि नदी-नालों का जल स्तर बढ़ने पर सावधानी बरतें। साथ ही पटवारियों के अलावा प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहता है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के स्कूलों, अन्य शासकीय भवनों को तैयार रखा जाता है। पीड़ित लोगों के खाने पीने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। हर घंटे जमीनी कर्मचारियों को हालात पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सीधी बात
शशिशेखर मिश्रा, तहसीलदार पखांजूर
सवाल - पखांजूर क्षेत्र में नदी-नालों से बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या अधिक है। बाढ़ की स्थिति से निपटने क्या व्यवस्था की गई है?
- देखिए क्षेत्र दुर्गम और पहुंचविहीन है। बाढ़ से बचाव के लिए लोगों को सावधान रहने कहा गया है। अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को हालात पर नजर रखने निर्देशित किया है।
सवाल - अचानक आपदा की स्थिति से निपटने क्या व्यवस्था है ?
- वर्तमान में सभी ग्राम पंचायतों के सरपंचों, सचिवों एवं पटवारियों की बैठक लेकर ग्रामीणों की मदद लेकर बचाव के लिए तैयार रहने कहा है। पूरी स्थिति की जानकारी जिला मुख्यालय को देने के निर्देश दिए हैं। आपदा के समय गंभीर परिस्थिति में जिला मुख्यालय से गोताखोर व बोट मंगवाए जाते हैं।
सवाल - जिले से बोट व गोताखोर आने में समय लगता है, इमरजेंसी में क्या करेंगे।
- बाढ़ के हालात की जानकारी हर घंटे ली जाती है। प्रशासनिक अमला लगातार जुटे रहने से गंभीर स्थिति की जानकारी मिल जाएगी तो जिला मुख्यालय से व्यवस्था कर ली जाएगी।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/38iGNm9
via
Comments
Post a Comment