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धागे की सप्लाई रुकी, बुनकारी छोड़कर फिर बीड़ी बनाने को मजबूर हो गए 500 परिवार

शहर से लगे ग्राम सरंगपाल के लगभग सभी परिवार बीड़ी बनाने का काम करते थे। बीड़ी बनाने से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक कर यहां के ग्रामीणों को बुनकर समिति बना कपड़ा बनाने के काम से जोड़ा गया। बीड़ी बनाने वाले हाथ कपड़ बुनने लगे। इससे उन्हें आय भी अच्छी हो रही थी तथा स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ रहा था। कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन में सप्लाई सिस्टम टूट गया जिसके चलते सरंगपाल ही नहीं जिले की सभी 6 बुनकर समितियों को धागा मिलना बंद हो गया। लगातार मांग करने के बाद भी धागा नहीं मिला तो पेट पालने इन परिवारों ने फिर से बीड़ी बनाने का काम शुरू कर दिया है। ये कहानी सिर्फ सरंगपाल के बुनकरों की ही नहीं जिले के सभी 6 बुनकर समितियों की है। बल्कि रायपुर हथकरघा बुनकर समिति के सचिव तो कह रह हैं कि ये हाल केवल कांकेर जिले में ही नहीं, पूरे प्रदेश की बुनकर समितियों का है। कांकर जिले में ही बुनकरों के करीब 500 परिवार हैं।
सरंगपाल जय दुर्गा बुनकर समिति से 34 लोग जुड़े हैं। जनवरी माह के बाद से समिति को धागा नहीं मिलने से समिति से जुड़े बुनकर बेरोजगार हो गए। आधे से अधिक तो वापस बीड़ी बनाने के काम में जुट गए तो बाकी मजूदरी करने जा रहे हैं। सरंगपाल के ही जय बगरूम देव समिति से 60 बुनकर जुड़े हैं। समिति से जुड़े कोमल देवांगन ने कहा कि लॉकडाउन के चलते धागा नहीं मिल पा रहा है। गांव की पद्मनी देवांगन ने कहा कि गांव के बहुत से लोग कपड़ा बनाने का काम कर रहे थे। इस काम में सम्मान भी था, स्वास्थ्य भी खराब नहीं होता था, आय भी अच्छी होती थी। धागा नहीं मिलने से सब निराश हैं। समिति से जुड़ी दुर्गा देवांगन ने कहा कि उसके पास धागा समाप्त हो चुका है। पिछले 20 दिन से काम पूरी तरह से बंद है। मजबूरी में वापस बीड़ी बनाने काम करना पड़ रहा है। ओकेश्वरी देवांगन ने कहा कि उसके पास भी 15 दिन से धागा नहीं है। सरकार को जल्द धागा उपलब्ध कराना चाहिए। जय बगरूम देव बुनकर समिति के मैनेजर सेवकराम देवांगन ने कहा कि अंतिम बार धागा 30 नवंबर को समिति को मिला था। इसके बाद नहीं मिला है। धागा की मांग कई बार की जा चुकी है। हर बार केवल आश्वासन मिलता है।
रायपुर से ही नहीं पहुंच रहा धागा
बुनकर समितियों को धागा रायपुर हाथकरघा कार्यालय से पहुंचाया जाता है। बुनकरों द्वारा तैयार कपड़ा वापस हाथकरघा कार्यालय द्वारा खरीद लिया जाता है। लॉकडाउन के पहले धागा पहुंचा था उसके बाद से नहीं पहुंचा है। औसतन कपड़ा बनाने के काम से प्रत्येक व्यक्ति को महीने में 5 से 7 हजार तक की आय हो जाती थी।
प्रदेश में 14 हजार परिवार के सामने रोजगार संकट
पूरे प्रदेश में 234 बुनकर समितियां हैं जो कपड़ा बनाने का काम करती हैं। इन समितियों से प्रदेश के 14 हजार परिवार जुड़े हंै। कांकेर जिले में 6 समितियां हैं जिसमें सरंगपाल की दो के अलावा एक हाटकोंदल, एक दसपुर तथा दो चारामा की है। जिले के 500 से अधिक परिवार इनसे जुड़े हैं जो फिलहाल धागा नहीं मिलने से बेरोजगार हो गए हैं।

स्कूल खुलने में देर इसलिए टूटा सप्लाई सिस्टम
प्रदेश के 14 हजार में से 12 हजार बुनकर सरकारी स्कूलों के यूनिफार्म का कपड़ा तैयार करते हैं। वर्तमान में लॉकडाउन के कारण स्कूल खुलने को लेकर असमंजस की स्थिति होने से हाथकरघा विभाग को स्कूल शिक्षा विभाग से यूनिफार्म के लिए कपड़ा देने का आदेश नहीं मिल पाया है। यही कारण है कि हाथकरधा विभाग बुनकर समितियों को धागा नहीं दे रहा है।

मनरेगा का काम बंद होगा तो भूखे मरने की आएगी नौबत : ग्राम कोड़ेेजुंगा के बलराम यादव तथा उसकी पत्नी रजिया ने कहा धागा नहीं मिलने से बेरोजगार हो गए तो परिवार को मनरेगा में मजदूरी काम करना पड़ रहा है। जब यह काम भी नहीं रहेगा तो भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।
प्रयास जारी : रायपुर हाथकरघा बुनकर समिति के सचिव डीपी मनहर ने कहा कि स्कूल यूनिफार्म के लिए कपड़े देने का आदेश अब तक नहीं मिल पाया है। शासन स्तर पर प्रयास चल रहा है। बुनकर समितियों को काम नहीं मिलने की समस्या केवल कांकेर जिला ही नहीं पूरे प्रदेश की है।



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Supply of yarn halted, 500 families forced to abandon weaving and make beedi again


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