दो महीने के लॉकडाउन के बाद नहीं उठा पाए दुकानों के शटर, प्रमुख बाजारों में 500 से ज्यादा व्यापारियों ने खाली कीं दुकानें
लॉकडाउन के दौरान करीब 2 महीने तक शहर की अधिकतर दुकानें बंद रही। कारोबार शून्य रहा। कारोबार बंद होने का असर अब बाजारों में दिखाई देना शुरू हो गया है। व्यापारियों का दावा है कि राजधानी के प्रमुख बाजारों में 500 से ज्यादा छोटी-बड़ी दुकानें बंद हो गई हैं। इनमें से ज्यादातर दुकानें किराये पर थी। गोलबाजार, मालवीय रोड, एवरग्रीन चौक, शास्त्रीबाजार, पंडरी थोक कपड़ा मार्केट, मोवा, एमजी रोड, स्टेशन रोड, गुढ़ियारी, टिकरापारा, लाखेनगर समेत शहर के प्रमुख बाजारों में कई तरह के सामानों की दुकानें बंद हो गई हैं।
दैनिक भास्कर ने प्रमुख व्यापारिक संगठनों से बात की तो पता चला कि दो महीने दुकानें बंद होने की वजह से दुकान का किराया, बिजली बिल, स्टाफ की सैलरी, बैंकों की किश्त और थोक माल लेने का उधार छोटे कारोबारियों पर ज्यादा हो गया था। इस वजह से दुकान में जो स्टॉक मौजूद था उसे बड़े कारोबारियों को बेचकर अपना कर्जा उतारने के बाद दुकानें बंद कर दी गई हैं। बाजार खुलने के बाद भी अभी खरीदारी आम दिनों की तुलना में 30 फीसदी भी नहीं हो रही है। बाजारों में दुकानें खुल जरूर रही है, लेकिन ग्राहकी नहीं के बराबर है। राजधानी के चार बड़े शॉपिंग मॉल में भी दुकानदारों ने दुकानें खाली करने का काम शुरू कर दिया है। मॉल कारोबारियों के अनुसार इन चार शॉपिंग मॉल में ही 100 से ज्यादा कारोबारियों ने दुकानें खाली कर दी है। इन दुकानदारों ने मॉल संचालकों से कहा है कि वे लॉकडाउन के दौरान तीन महीने का किराया नहीं दे सकते।आने वाले दिनों में भी लोग शॉपिंग मॉल से दूरी बना सकते हैं। ऐसे में कारोबार करना मुश्किल होगा। इसलिए वे दुकानें खाली कर रहे हैं।
"राजधानी में ही नहीं राज्यभर में दुकानदारों की स्थिति खराब है। इनमें ज्यादातर छोटे कारोबारी शामिल हैं।"
जितेंद्र बरलोटा, अध्यक्ष छग चैंबर
"दुकानें अभी से नहीं बल्कि एक महीने पहले से ही बंद हो रही हैं। बिना आय के खर्चे कैसे मेंटेन होंगे।"
अमर पारवानी, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कैट
"जब बाजार खुले तो हफ्ते में दो दिन चले, ऐसे में छोटे कारोबारी तो पहले ही बंद हो गए थे और बड़े कारोबारी भी हाथ खड़े कर रहे हैं।"
-चंदर विधानी, अध्यक्ष पंडरी कपड़ा बाजार
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