शहर में चल रहे नेशनल हाईवे की सड़क चौड़ीकरण में बिजली विभाग के खंभे और ट्रांसफार्मर रोड़ा बन रहे हैं। इन्हें हटाने बिजली व नेशनल हाईवे विभाग के बीच लंबे समय से पत्रों के जरिए तकरार चल रही है। नेशनल हाईवे ने खंभे-ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने कहा तो विद्युत विभाग ने 43.70 लाख रुपए मांगे। नेशनल हाईवे विभाग का कहना है विद्युत विभाग ने उनकी जमीन पर अतिक्रमण कर खंभे और ट्रांसफार्मर खड़े किए हैं, विद्युत विभाग अतिक्रमण हटाए नहीं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नेशनल हाईवे पर शहर के ऊपर नीचे रोड से दूध नदी पुल तक दस मीटर चौड़ी सीसी सड़क बननी है। इसका भूमिपूजन शनिवार को िवधायक शिशुपाल शोरी करेंगे। इसमें पट्टेधारकों की भी जमीन आ रही है, जिसे लेकर विवाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है। दूसरा विवाद बिजली व नेशनल हाईवे के बीच ट्रांसफार्मर तथा खंभे शिफ्टिंग को लेकर चल रहा है। नेशनल हाईवे ने सड़क चौड़ीकरण में आड़े आ रहे 43 बिजली खंभे और 4 ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने पत्र जारी किया। जवाब में बिजली विभाग ने नेशनल हाईवे विभाग को पत्र लिखकर कहा बिजली खंभे व ट्रांसफार्मर हटाने मिले आवेदन का प्राक्कलन तैयार किया गया है। खंभे व ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने में 43.70 लाख का खर्च आ रहा है, जिसका नेशनल हाईवे विभाग भुगतान करें। 6 जून को बिजली विभाग ने एक और पत्र नेशनल हाईवे को भेजा, जिसमें कहा गया है अब तक खंभे व ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग का भुगतान जमा नहीं किया है। जब तक भुगतान नहीं होगा तब तक खंभे व ट्रांसफार्मर शिफ्ट नहीं किया जा सकता।
प्रति वर्ग मीटर 500 रुपए वसूला जा सकता है किराया : दोनों सरकारी महकमें अपनी-अपनी बातों पर अड़े रहने के चलते विवाद सुलझता नहीं दिख रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार नेशनल हाईवे की जमीन में सरकारी या निजी निर्माण करने या लगाए पोल के लिए प्रति वर्ग मीटर 500 रुपए तक किराया संबंधित से वसूला जा सकता है। कांकेर शहर के बीच से गुजरने वाली सड़क 1973 में नेशनल हाईवे घोषित हुई है, जबकि बिजली के खंभे इसके पहले से लगे हुए हैं। माना जा रहा कि एनएच बिजली विभाग से पिछले 48 साल का भारी भरकम किराया वसूल सकता है।
दो विभागों के बीच पिछले 8 माह से चल रहा पत्राचार
दोनों सरकारी महकमों के बीच 8 माह से पत्राचार विवाद चल रहा है। नेशनल हाईवे ने सबसे पहले 7 अक्टूबर 2019 को पत्र जारी किया था। इसके बाद 5 दिसंबर, 22 जनवरी, 18 फरवरी, 20 फरवरी को पत्र बिजली विभाग को भेजा। पांच पत्र भेजने के बाद पहली बार 22 अप्रैल को बिजली विभाग ने पत्र लिखकर 43.70 लाख की मांग की। इसके बाद 28 मई को फिर नेशनल हाईवे ने शिफ्टिंग के लिए पत्र लिखा तो 6 जून को बिजली विभाग ने बिना भुगतान के खंभे व ट्रांसफार्मर शिफ्ट नहीं कर पाने का दो टूक जवाब दे दिया।
नगर पालिका और बीएसएनएल राजी
सड़क चौड़ीकरण में नगर पालिका के पेयजल सप्लाई के दो चेंबर भी दायरे में आ रहे हैं। पालिका ने स्वयं के खर्च पर दोनों चेंबर हटाने सहमति दे दी है। इसी प्रकार बीएसएनएल ने टेलीफोन का पोल भी हटाने कहा है, जिसे विभाग बिना किसी खर्च मांगे हटाने तैयार है। शहर में दो जगह पीएचई विभाग की जलावर्धन योजना की पाइपलाइन भी क्रास हुई है। विभाग के अनुसार सड़क बनने से इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पीएचई विभाग ने गारंटी दी है कि सड़क बनने के बाद रिपेयरिंग के लिए दोबारा खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एनएच के एसडीओ बोले - चर्चा का दौर जारी है
एनएच के एसडीओ संतोष नेताम ने बताया बिजली विभाग ने बिना किसी अनुमति या सहमति के नेशनल हाईवे की जमीन में खंभे व ट्रांसफार्मर लगाए हैं। इसे हटाने बिजली विभाग को पत्र लिखा गया है। अभी चर्चा चल रही है।
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